राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: अब नोट गिनने वाले सभी 44 कर्मचारियों पर शिकंजा, पुलिस ने मांगा कमाई और खर्च का पूरा ब्योरा

अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की रकम में हुई हेराफेरी के मामले में पुलिस की जांच अब बहुत तेज हो गई है। चढ़ावे के पैसों में गड़बड़ी करने के आरोप में मुख्य आरोपी पहले ही जेल की हवा खा रहे हैं और पुलिस उनके बैंक खातों को खंगाल रही है। अब इस जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंदिर के गणना कक्ष यानी वह कमरा जहां चढ़ावे के नोट गिने जाते हैं, वहां काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर शिकंजा कसा गया है। पुलिस ने इन सभी कर्मचारियों से उनकी कमाई और रोजाना के खर्च का पूरा लिखित ब्योरा मांग लिया है।

सीओ दफ्तर पहुंचे कर्मचारी, जमा करने लगे अपना हिसाब

अधिकारियों के आदेश के बाद मंगलवार को मंदिर के कई कर्मचारी क्षेत्राधिकारी यानी सीओ कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस की ओर से मांगी गई अपनी आर्थिक जानकारियों को लिखित रूप में जमा कराना शुरू कर दिया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि जून के महीने में इस बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद से अब तक इन कर्मचारियों के बैंक खातों से कितनी बार और कितने रुपयों का लेन-देन हुआ है। इसके साथ ही नोट गिनने वाले कमरे के बाहर तैनात रहने वाले निजी सुरक्षा गार्डों से भी पूछताछ कर जानकारी जुटाई जा रही है।

अचानक ठाठ-बाठ बढ़ने से शक के घेरे में आए कर्मचारी

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नोट गिनने के काम में लगे कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ समय में पहले के मुकाबले अचानक बहुत ज्यादा बदल गई है। स्थानीय लोगों और सहकर्मियों ने पुलिस को बताया है कि पिछले कुछ महीनों में कुछ कर्मचारियों के रहन-सहन और खर्च करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया था। अब पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी इस बात का पता लगा रही है कि क्या इन कर्मचारियों के इस ठाठ-बाठ का संबंध चढ़ावे की हेराफेरी से तो नहीं है। गणना कक्ष से नोटों के बक्से बैंक तक ले जाने वाले हर शख्स से पूछताछ की जा रही है।

दो साल में बनाई संपत्तियों की भी होगी पूरी जांच

जानकारी के मुताबिक राम मंदिर में आने वाले दान के पैसे और कीमती धातुओं को गिनने के लिए कुल चौवालिस कर्मचारी तैनात थे। इनमें से सात मुख्य आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब बचे हुए सभी सैंतीस कर्मचारियों की संपत्ति की जांच हो रही है ताकि यह साफ हो सके कि कहीं इस खेल में वे भी तो शामिल नहीं थे। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने पिछले दो साल के भीतर कहां-कहां जमीन या दूसरी संपत्तियां खरीदी हैं। इसके साथ ही मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की लापरवाही की भी जांच चल रही है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे हो गई।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *