चोर का माल चांडाल खाए
छत्तीसगढ़ में शराब का कारोबार खूब फलता-फूलता है। चाहे आबकारी विभाग की निगरानी में चलने वाला शराब का व्यापार, ठेकेदार करें या सरकार, कोई फर्क नहीं पड़ता। शराब की खपत इतनी है कि पैसों की बरसात होती है और इन पैसों के लालच में सामाजिक मूल्यों और दायित्वों को ताक पर रख दिया है। प्रदेश का आबकारी विभाग कमाऊ पूत की तरह इतराता हुआ चारों तरफ बर्बादी बिखेर रहा है। पूरे प्रदेश की शराब दुकानों में निर्धारित कीमत से अधिक कीमत पर खुले आम शराब बेची जा रही है। मध्यप्रदेश से शराब की तस्करी हो रही है और तो और तस्करी में पकड़ी गई शराब में भी गड़बड़झाला है। इन्हे नष्ट करने की बजाय बाजार में बेच दिया जा रहा है। अवैध शराब पकडऩे वाले उडऩदस्तों की निगरानी में शराबखोरी हो रही है। प्रदेश की राजधानी हो या गांव हर जगह हवा में शराब समा गई है। विभाग के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी जब ज्यादा ही बेकाबू होने लगे तो सरकार ने इन्हे बदलने का फैसला किया। इस बदलाव की भी बड़ी रोचक कहानी है। आपने सुना होगा कि पुलिस विभाग से परिवहन विभाग में मलाईदार जगहों पर पोस्टिंग और पद की नीलामी होती है। कुछ ऐसा ही आबकारी विभाग में हुआ। परिवहन विभाग में तो कुछ पद मलाईदार हैं, लेकिन आबकारी में तो पूरा प्रदेश चारागाह है, जहाँ मर्जी वहां चरो, कोई रोकने टोकने वाला नहीं। विभाग ने फेरबदल की योजना बनाई, मगर अधिकारी और कर्मचारियों ने बंद कमरों में हुई नीलामी में तय राशि का भुगतान भी कर दिया। इसके बाद तीस लोगों की सूची जारी हुई जिनका नाम आ गया उनकी लाटरी लग गई, लेकिन कई लोग बदनसीब रहे, जिनका पैसा देकर भी सूची में नाम नहीं आया। अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पीड़ा ऐसी कि बता भी नहीं सकते और दर्द ऐसा कि सहन भी नहीं हो रहा। यह तो वही बात हुई ना कि ‘चोर का माल चांडाल खाए, पापी हाथ मलता जाएÓ, लेकिन बुनियादी सवाल अब भी वही है कि तबादला कर देने से क्या यह करतूत रुक जाएगी ?
कब मिलेगी ‘कुनेन की कड़वी खुराक
प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। हर तरफ एक ही शोर है क्या मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा? अगर हुआ तो क्या दो चार मंत्री हटाए जाएंगे? क्या सारे मंत्रियों का इस्तीफ़ा लेकर नए सिरे से मंत्रिमंडल बनेगा? इन आशंकाओं को उस दिन और बल मिल गया, जब मुख्यमंत्री निवास में देर रात अचानक सारे मंत्रियों को आनन फानन में बैठक के लिए बुलावा गया। उस समय उप मुख्यमंत्री अरुण साव अपने क्षेत्र लोरमी में थे तो श्याम बिहारी जायसवाल खडग़वां, दयालदास नवागढ़ में। दूसरे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा झारखण्ड में, वित्त मंत्री ओ पी चौधरी मैंगलोर में और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल राजस्थान में थे। एक लाइन के इस संदेश पर सभी भागते दौड़ते रायपुर लौटे और बैठक में शामिल हुए। बताते हैं कि राजेश अग्रवाल ने तो बैठक में यहां तक कह दिया कि ऐसे बैठक मत बुलाया करो। इतनी हड़बड़ी में मेरा हार्ट फेल हो जाता है। बहरहाल, बैठक देर रात तक चली और पूरे प्रदेश में अफवाहें उड़ती रहीं। बैठक में संगठन से अजय जामवाल और पवन साय मौजूद थे। संगठन ने मंत्रियों के कामकाज और खासकर कार्यशैली की बारीक समीक्षा की। प्रदेश के कृषि विभाग, राजस्व, आबकारी, वन, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में मंत्रियों की लचर कार्यशैली के चलते इन विभागों की हालत गंभीर होती जा रही है। सभी मंत्रियों के विभाग में ओ एस डी के अनावश्यक हस्तक्षेप से भाजपा कार्यकर्ता खासा नाराज चल रहा है और सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। बैठक में फैसलों की ठोस जानकारी तो बाहर नहीं आई, लेकिन अगले दिन संगठन के नेता दिल्ली चले गए। उसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी दिल्ली निकल गए। जहां उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। एक बात तो तय है कि कोई बड़ी सर्जरी जरूर होगी लेकिन कब? फिलहाल केंद्र की भाजपा की प्राथमिकता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन है। उसके बाद मानसून सत्र की तैयारी में वह व्यस्त है। इस बीच मंत्रिमंडल में फेरबदल हो ऐसा फिलहाल संभव नहीं है। प्रदेश का हर मंत्री इस वक्त सहमा हुआ है कि कौन जाने कब उसकी विदाई हो जाये और शायद इसीलिए कुछ मंत्री अपने को सुरक्षित करने में लगे हैं तो कुछ माल समेटने में। इन संभावनाओं के चलते सरकार में कोई बड़े निर्णय भी अटक रहे हैं। कैबिनेट की बैठक भी औपचारिकता मात्र लग रही हैं। कुल मिलकर सरकार के कामकाज का सन्देश ऊपर बहुत अच्छा नहीं है और इसलिए किसी कड़े फैसले की उम्मीद की जा रही है लेकिन फिर वही सवाल कि आखिर कब तक?
रायपुर के करोड़पति
रायपुर में रियल एस्टेट का कारोबार अंधा धुंध फल-फूल रहा है। शहर के चारों तरफ बड़ी-बड़ी महंगी इमारतें और बंगले बन रहे हैं। इन बंगलों की कीमत कोई सामान्य आदमी सुन ले तो उसकी मानसिक स्थिति खऱाब हो जाए। शहर में पुराना विधानसभा रोड, शंकर नगर, वीआईपी रोड, फुंडहर चौक, एक्सप्रेस वे से लेकर नया रायपुर तक रायपुर के नव धनाढ्य वर्ग का जलवा आपको देखने मिल जायेगा। किसी भी कालोनी में आठ करोड़ से नीचे कोई बंगला ही नहीं है और तीन-तीन करोड़ रूपये के तो अपार्टमेंट बिक रहे हैं। आखिर इस शहर में इतने सारे करोड़पति कहाँ से आ गए? जानकारी के अनुसार अफसरों और नेताओं का काला पैसा इन परियोजनाओं में खर्च हो रहा है। बड़ी संख्या में अधिकारी और नेता इन करोड़ों के बंगलों में निवास भी कर रहे हैं। आलम यह है कि कोई भी प्रोजेक्ट आता है तो उसकी शुरुआत ही करोड़ों से होती है और दिलचस्प ये कि सारे प्रोजेक्ट सफलता के उफान पर हैं। जब नया रायपुर बन रहा था उस समय भी यहां गोल्फ क्लब के पास बने करोड़ों के बंगले हाथों हाथ बिक गए थे। जानकार बताते हैं कि इन आलिशान कालोनियों में अधिकारी नेताओं का गठजोड़ कच्चे को पक्का करने में लगा है। शहर के भीतर और बाहरी इलाकों में हर अच्छी जगह इन करोड़पतियों के पास है और मध्यम आय वालों के लिए तो ये सब सपने के समान है। जानकारों का कहना है कि अब ये करोड़पति नया रायपुर में अपनी आमद दर्ज करने वाले हैं, क्योंकि प्रदेश के एक प्रभावशाली मंत्री ने यहां सेंध लेक के आसपास जमीन खरीद रखी है। जिस पर करोड़ों के आशियाने बनेंगे और वहां नए करोड़पतियों की आबादी बसेगी। नया रायपुर में भी सरकार के पास निम्न मध्यम आय वालों को देने के लिए कुछ नहीं है, क्योंकि जमीन का भाव इतना अधिक है कि सुनते ही पसीने छूट जाएं।
मनगटा मतलब एनसीआर का सूरजकुंड
प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों एक घोषणा की थी कि देश की राजधानी दिल्ली के आसपास विकसित किये गए एनसीआर की तर्ज पर रायपुर, नया रायपुर, दुर्ग, और भिलाई को मिलाकर (स्टेट कैपिटल रीजन) एससीआर विकसित किया जायेगा। दिल्ली एनसीआर जाने वालों को पता होगा कि इस एनसीआर में सूरजकुंड नाम की जगह भी विकसित हो गई है। जहां सैकड़ों की संख्या में आलीशान रिसॉर्ट चल रहे हैं। इन रिसॉर्ट में भी आए दिन आपराधिक वारदात होती हैं, लेकिन प्रभावशाली लोग इन्हें दबा देते हैं। अब सरकार का एससीआर विकसित हो। इसके पहले ही यहां सूरजकुंड की तरह दुर्ग से लगे राजनांदगाव के करीब मनगटा विकसित हो गया है। यहां भी दर्जनों रिसॉर्ट खुल गए हैं, जहां युवा जोड़े आपको दिख जाएंगे। हाल ही में मनगटा के एक रिसॉर्ट में एक युवती की हत्या कर दी गई। नया रायपुर और उसके आसपास सैकड़ों फ़ार्म हाउस रिसॉर्ट की तरह चल रहे हैं। जहां युवाओं की रेव पार्टी होती है और जमकर सुट्टा चलता है। दिलचस्प बात यह है कि सब कुछ खुलेआम होता है, लेकिन उन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं। मनगटा की वारदात एक सबक है। सरकार में बैठे लोगों के लिए बेशक एससीआर बनाएं, लेकिन मनगटा के एक रिसॉर्ट में एक युवती की हत्या से इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि इसकी आड़ में कहीं मनगटा भी एनसीआर में सूरजकुंड का आकार ना ले ले।