भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। ढाका और बीजिंग की ओर से जारी एक साझा बयान में कहा गया है कि दोनों देश मिलकर मोंगला पोर्ट को आधुनिक और बेहतर बनाएंगे। भारत के लिए यह खबर इसलिए चिंताजनक है क्योंकि नई दिल्ली इस पोर्ट को अपने पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ने और सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े विकल्प के रूप में देख रहा था।

तीस्ता नदी परियोजना पर भी मिला चीन का साथ
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पानी के सही इस्तेमाल, बाढ़ को रोकने और नदियों की सिल्ट यानी जमी हुई मिट्टी की सफाई करने को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन ने तीस्ता नदी के रख-रखाव और उसके नए सिरे से विकास की परियोजना में बांग्लादेश को हर संभव मदद देने का वादा किया है। इसके लिए दोनों देशों के विशेषज्ञ जल्द ही मिलकर काम शुरू करेंगे। इसके साथ ही समुद्री मामलों में भी दोनों देश एक-दूसरे की मदद करेंगे।
शेख हसीना के समय भारत से हुई थी डील
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समय इस पूरे मामले की तस्वीर काफी अलग थी। जून दो हजार चौबीस में जब शेख हसीना भारत आई थीं, तब उन्होंने तीस्ता नदी के प्रोजेक्ट को भारत के साथ मिलकर पूरा करने की बात कही थी। भारत ने इस काम के लिए करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर की आर्थिक और तकनीकी मदद देने की पेशकश भी की थी। इसके पहले साल दो हजार अठारह में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत बांग्लादेश ने भारत को मोंगला और चटगांव पोर्ट के इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।
चटगांव में बनेगा चीनी औद्योगिक क्षेत्र
नए समझौतों के तहत चीन अब बांग्लादेश के चटगांव इलाके में एक बड़ा आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित करेगा। इसके अलावा चीन पूरी दुनिया में जो बुनियादी ढांचे यानी सड़क और पुल बनाने का बड़ा अभियान चला रहा है, उसे बांग्लादेश में और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। बांग्लादेश के इस कदम से आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।