भानुप्रतापपुर। केंद्र सरकार द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य देश को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाना है, लेकिन भानुप्रतापपुर नगर में सार्वजनिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति इस अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। इसका ताजा उदाहरण अंतागढ़ रोड बस स्टॉप के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय है, जिसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है।

वार्ड क्रमांक 9 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल से लगे इस सार्वजनिक शौचालय में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। शौचालय के भीतर पेशाब और गंदा पानी जमा होने से स्थिति नारकीय हो गई है। चारों ओर फैली दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोग और राहगीर काफी परेशान हैं। हालत यह है कि यात्रियों और आम नागरिकों ने इस शौचालय का उपयोग करना लगभग बंद कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय की नियमित साफ-सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण यह सुविधा अब समस्या का कारण बन गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि शौचालय के समीप ही खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जनपद प्राथमिक शाला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आम नागरिकों के आवागमन का प्रमुख मार्ग स्थित है। इसके बावजूद संबंधित विभाग और नगर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

नागरिकों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सार्वजनिक सुविधाओं की देखरेख नहीं होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध और गंदगी के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल सफाई कराई जाए, जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों और यात्रियों को राहत मिल सके।
सवाल यह है कि जब अस्पताल, स्कूल और सरकारी कार्यालय के पास स्थित शौचालय का यह हाल है, तो स्वच्छ भारत मिशन के दावों को जमीनी स्तर पर कितना अमल मिल रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग शिकायतों का इंतजार करेगा या फिर जनता की परेशानी को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करेगा?