डीजल-पेट्रोल की किल्लत से हाहाकार; केवल चारामा ही नहीं, धमतरी से रायपुर तक यही हाल; किस्त नहीं चुका पा रहे ट्रैक्टर संचालक

अनूप वर्मा, जनधारा संवाददाता (चारामा)

चारामा। वर्तमान में खेती-किसानी का सीजन चरम पर है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज होनी चाहिए थी, लेकिन विडंबना देखिए कि आज किसान और ट्रैक्टर संचालक अपने काम-धंधे को छोड़कर पेट्रोल पंपों पर कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। ईंधन की भारी किल्लत के कारण आम नागरिकों से लेकर अन्नदाता बेहद परेशान हैं। सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि पर्याप्त ईंधन न मिलने से उनके कृषि कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।

सिर्फ चारामा नहीं… कर्रा, लखनपुरी, धमतरी और रायपुर तक फैला संकट

यह समस्या केवल चारामा के मेहता पेट्रोल पंप तक ही सीमित नहीं है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि चारामा के अतिरिक्त कर्रा पेट्रोल पंप हो, लखनपुरी हो या फिर धमतरी और राजधानी रायपुर के आसपास के तमाम पेट्रोल पंप—हर जगह इन दिनों डीजल और पेट्रोल की भारी किल्लत बनी हुई है। पूरे संभाग और प्रदेश के कई हिस्सों में हाहाकार मचा है, लेकिन इस अव्यवस्था की सबसे ज्यादा मार बार-बार सिर्फ और सिर्फ किसानों को ही झेलनी पड़ रही है, क्योंकि यही समय उनकी सालभर की कमाई और मुख्य खेती-किसानी का है।

कलेक्टर के ‘मुंडी लाने’ वाले आदेश से बढ़ा संकट; समय और ईंधन की बर्बादी

इस संकट के बीच प्रशासन (कलेक्टर) का यह आदेश किसानों के लिए जी का जंजाल बन गया है कि किसानों को ट्रैक्टर में डीजल तभी दिया जाएगा जब वे ट्रैक्टर की ‘मुंडी’ (इंजन) लेकर खुद पेट्रोल पंप पर आएंगे। किसी को भी डिब्बे में डीजल देने पर पूरी तरह रोक है।

किसानों और ट्रैक्टर संचालकों ने इस आदेश को तुरंत बदलने की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों से 10 से 15 किलोमीटर दूर भारी-भरकम ट्रैक्टर की मुंडी लेकर पंप तक आने-जाने में ही किसानों का 1 से सवा घंटा बर्बाद हो जा रहा है। इतनी दूर ट्रैक्टर चलाकर लाने में ही अच्छा-खासा डीजल और पैसा रास्ते में फुंक जाता है। ऊपर से पंप पहुंचने पर सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे के बीच घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है।

किसानों की मांग: “मुंडी लाने की व्यवस्था बंद हो, डिब्बों में मिले डीजल”

किसानों ने कलेक्टर से निवेदन किया है कि ट्रैक्टर की मुंडी लाने की इस अनिवार्य व्यवस्था को तत्काल बंद किया जाए और किसानों को पहले की तरह डिब्बों (डब्बों) में ही पर्याप्त मात्रा में डीजल दिया जाए, ताकि उनका समय, पैसा और ईंधन व्यर्थ होने से बच सके।

किस्त (EMI) पर लिए हैं ट्रैक्टर, अब बैंक की नोटिस का सता रहा डर

डीजल संकट की सबसे बड़ी मार ट्रैक्टर संचालकों पर पड़ी है। चर्चा के दौरान ट्रैक्टर संचालकों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश युवाओं और किसानों ने बैंकों से फाइनेंस कराकर किस्तों (EMI) पर ट्रैक्टर उठाए हैं। खेती के इस सीजन में दिनभर में कम से कम 5000 से 7000 रुपये के डीजल की जरूरत होती है, लेकिन पंपों पर मात्र 2000 से 3000 रुपये का ही डीजल दिया जा रहा है।

पर्याप्त डीजल नहीं होने से ट्रैक्टर दिनभर खड़े रह जाते हैं, जिससे काम पूरी तरह ठप पड़ा है। काम नहीं होने के कारण उनकी आवक (कमाई) बंद हो गई है, जिससे अब उनके सामने ट्रैक्टर की मासिक किस्तें पटाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। संचालकों को डर सता रहा है कि कमाई न होने से किस्तें बाउंस होंगी और उन पर आर्थिक कर्ज और बढ़ेगा।

खेती की लागत बढ़ी, जुताई के दामों में आया उछाल

डीजल की इस राशनिंग का सीधा असर अब खेतों की जुताई पर दिखने लगा है। ट्रैक्टर मालिकों का कहना है कि डीजल की किल्लत और उसे हासिल करने में आ रहे अतिरिक्त खर्च के कारण लागत बढ़ गई है। जो जुताई पहले 1300 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से होती थी, अब उसके दाम मजबूरन बढ़ाकर लिए जा रहे हैं। महंगाई की इस दोहरी मार का खामियाजा सीधे तौर पर गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

पंप प्रबंधन की दलील: ‘ऊपर से ही आ रही है कम सप्लाई’

जब इस संबंध में चारामा के मेहता पेट्रोल पंप सहित अन्य पंपों के कर्मचारियों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि ऊपर से ही कंपनियों द्वारा डीजल-पेट्रोल की सप्लाई बेहद कम कर दी गई है। एक दिन में केवल 5000 लीटर ही ईंधन मिल पा रहा है। ऐसे में सभी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पर्याप्त डीजल-पेट्रोल मिल सके, इसीलिए सुबह 8 से रात 8 बजे तक का समय और सीमित मात्रा (राशनिंग) का नियम बनाया गया है।

सरकार के दोहरे रवैये पर फूटा आक्रोश

सरकार की इस लचर व्यवस्था पर किसानों और ट्रैक्टर चालकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि: “एक तरफ देश का अन्नदाता सीजन के समय डीजल की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है और ट्रैक्टर की मुंडियां लेकर घूमने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ बड़े-बड़े उद्योगों, बड़े हाईवा, रसूखदार नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के वाहनों के लिए पर्याप्त पेट्रोल-डीजल हमेशा उपलब्ध रहता है। क्या सरकार के लिए देश के किसान और युवाओं की कोई अहमियत नहीं है?”

किसानों और ट्रैक्टर संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही डिब्बों में डीजल देने की व्यवस्था बहाल नहीं की गई और आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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