अंतरराष्ट्रीय संकट का असर: ग्रामपुरी के HP पेट्रोल पंप पर डीजल के लिए उमड़ी ट्रैक्टरों की कतारें, 2 दिन बाद मिली राहत

अनूप वर्मा, चारमा : चारमा/ग्रामपुरी: ईरान-इराक के बीच चल रहे युद्ध और वैश्विक तनाव का असर अब देश के साथ-साथ प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भी साफ तौर पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजे इस संकट की वजह से पिछले कुछ दिनों से ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी कड़ी में स्थानीय ग्रामपुरी स्थित एचपी (HP) पेट्रोल पंप पर पिछले दो दिनों से पेट्रोल और खासकर डीजल की भारी किल्लत बनी हुई थी।

खेती-किसानी के पीक सीजन में संकट

मानसून की आमद के साथ ही क्षेत्र में खेती-किसानी का काम जोरों-शोरों से शुरू हो चुका है। ऐसे समय में डीजल की किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। चूंकि आसपास दूसरा कोई पेट्रोल पंप नहीं है और उनकी दूरी अधिक है, इसलिए क्षेत्र के किसान इसी पंप पर ईंधन आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। शनिवार सुबह जैसे ही पंप पर टैंकर पहुंचने की सूचना मिली, आस-पास के इलाकों से 100 से अधिक ट्रैक्टर संचालक तुरंत पंप की ओर दौड़ पड़े और डीजल के लिए लंबी कतारें लग गईं।

किसानों का दर्द: सरकार के नए फरमान और कड़े नियमों से बढ़ी परेशानी

पेट्रोल पंप पर डीजल लेने पहुंचे किसानों और ग्रामीणों ने अपनी आपबीती और परेशानियां साझा करते हुए सरकार के नए नियमों के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की। सरकार और प्रशासन द्वारा यह निर्देश दे दिया गया है कि अब पंपों पर डब्बों या जरकीनों में डीजल नहीं दिया जाएगा, बल्कि ट्रैक्टर को खुद पंप तक लाना अनिवार्य होगा। किसानों का कहना है कि पहले वे ट्रैक्टर खेत या घर पर ही छोड़ देते थे और डब्बों में डीजल ले जाते थे। लेकिन अब इस नए फरमान के कारण किसानों को 10, 15 और कई बार 20 किलोमीटर दूर से ट्रैक्टर की मुंडी (इंजन) लेकर पंप तक आना पड़ रहा है। इतनी दूर से ट्रैक्टर लाने और वापस ले जाने के चक्कर में ही उनका ₹500 से अधिक का डीजल रास्ते में ही बर्बाद हो जा रहा है, जो किसानों पर दोहरी मार है। खेती के इस मुख्य सीजन में ट्रैक्टरों के लिए 20-25 या 30 लीटर डीजल से काम नहीं चलने वाला है। किसानों की मांग है कि इस व्यावहारिक समस्या को देखते हुए सरकार डब्बों में पर्याप्त डीजल देने की छूट प्रदान करे।

लोन और EMI की चिंता: ठप हो सकती है कमाई

ट्रैक्टर चालकों के मन में इस बात का भी डर है कि अगर दो-तीन दिनों में दोबारा डीजल खत्म हो गया, तो उनका क्या होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सीजन ट्रैक्टर मालिकों की कमाई का मुख्य जरिया होता है। कई स्थानीय किसानों और युवाओं ने बैंक से लोन लेकर और भारी ईएमआई (EMI) पर ट्रैक्टर उठाए हैं। यदि डीजल की किल्लत के कारण ट्रैक्टर खड़े रह गए, तो उनकी सीजन की कमाई खत्म हो जाएगी और वे बैंक की किस्तें नहीं चुका पाएंगे।

पंप प्रबंधन ने सूझबूझ से संभाली व्यवस्था

अचानक डीजल आने की खबर और दोबारा किल्लत होने के डर से उमड़ी भारी भीड़ के कारण एक समय व्यवस्था बिगड़ने लगी थी। लेकिन पेट्रोल पंप संचालक और कर्मचारियों ने सूझबूझ से काम लिया। उन्होंने सभी ट्रैक्टर चालकों को कतारबद्ध किया और बारी-बारी से सभी को पर्याप्त डीजल का वितरण किया। देर शाम तक चले इस वितरण से किसानों को तात्कालिक राहत तो मिली है, लेकिन भविष्य को लेकर उनकी चिंता बरकरार है।

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