आईपीएल के सुपरस्टार वैभव सूर्यवंशी पहली इंटरनेशनल परीक्षा में हुए फेल, श्रीलंका ए के खिलाफ दांबुला में मिली बड़ी सीख

स्पोर्ट्स डेस्क: इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के लिए इंटरनेशनल लेवल का पहला मुकाबला कुछ खास नहीं रहा। श्रीलंका ए के खिलाफ दांबुला में खेली जा रही त्रिकोणीय सीरीज के मैच में भारत ए की तरफ से खेलते हुए 15 साल के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 14 रन बनाए। भले ही वैभव की यह पारी बहुत छोटी रही, लेकिन इस मुकाबले ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट का एक बहुत बड़ा और जरूरी सबक सिखा दिया है। मैच शुरू होने से पहले हर किसी की नजरें सिर्फ वैभव पर ही टिकी हुई थीं। आईपीएल (IPL 2026) में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप जीतने वाले इस खिलाड़ी से श्रीलंका में भी धमाकेदार शुरुआत की उम्मीद थी।

क्रीज पर आते ही लगाए तीन चौके, लेकिन एक गलती और पवेलियन लौटे वैभव

मैच में ओपनिंग करने उतरे वैभव सूर्यवंशी ने आते ही अपने पुराने अंदाज में तीन बेहतरीन चौके जड़े। उन्हें देखकर लग रहा था कि वह आज भी किसी बड़े मूड में आए हैं और श्रीलंका के गेंदबाजों की क्लास लगाने वाले हैं। लेकिन पारी के चौथे ओवर में एक छोटी सी लापरवाही उन पर भारी पड़ गई। श्रीलंकाई गेंदबाज मोहम्मद शिराज की एक फुल लेंथ गेंद पर वैभव ने हवा में मिड-ऑफ के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की। गेंद बल्ले पर ठीक से आई नहीं और वह इसे ज्यादा ऊंचाई नहीं दे सके। मिड-ऑफ पर मुस्तैद श्रीलंकाई कप्तान सहान अराचिगे ने कोई गलती नहीं की और एक शानदार कैच लपककर वैभव की पारी का अंत कर दिया। वैभव ने 12 गेंदों का सामना किया और 14 रन बनाकर आउट हो गए।

सहवाग जैसी निडरता अच्छी है, लेकिन लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए कोहली जैसा धैर्य जरूरी

क्रिकेट के मैदान से वैभव के लिए जो सबसे बड़ा सबक निकला है, वह यह है कि आईपीएल (IPL Tournament) और इंटरनेशनल क्रिकेट में जमीन-आसमान का अंतर होता है। आईपीएल में आपकी आक्रामकता आपको मैच जिता सकती है, लेकिन जब आप बड़े स्तर पर खेलते हैं तो सिर्फ टैलेंट काम नहीं आता। वहां आपको पिच का मिजाज समझना होता है और गेंदबाजों को सम्मान देना पड़ता है। क्रिकेट पंडितों का कहना है कि वीरेंद्र सहवाग जैसी बेखौफ बल्लेबाजी देखना अच्छा लगता है, लेकिन विराट कोहली (Virat Kohli) जैसा धैर्य और परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालने की कला ही खिलाड़ी का करियर बनाती है। वैभव को समझना होगा कि पिच उनके हिसाब से नहीं बदलेगी, बल्कि उन्हें पिच के हिसाब से अपना गियर बदलना होगा। दांबुला में तेज हवा चल रही थी और गेंदबाजों को मदद मिल रही थी, ऐसे में जोखिम भरा शॉट खेलना गलत फैसला साबित हुआ।

ऋतुराज गायकवाड़ ने जड़ा शानदार शतक, कप्तान तिलक वर्मा के साथ मिलकर भारत को संभाला

अगर मैच (India A vs Sri Lanka A) की बात करें तो टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत ए की शुरुआत बेहद खराब रही थी। वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह के सस्ते में आउट होने की वजह से टीम इंडिया ने सिर्फ 16 रन पर अपने दो मुख्य विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद टीम के उपकप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और कप्तान तिलक वर्मा ने समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए मोर्चा संभाला। ऋतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaikwad) ने कमाल की बल्लेबाजी करते हुए 112 गेंदों में 101 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली। यह उनके लिस्ट-ए करियर का 21वां शतक है। दूसरी ओर कप्तान तिलक वर्मा ने भी 97 गेंदों पर 60 रनों का अहम योगदान दिया। दोनों सीनियर बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 150 रनों की बड़ी पार्टनरशिप करके भारतीय टीम को एक मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

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