प्रशासनिक लापरवाही की आग में झुलस रहा चारामा: 20 मिनट की दूरी तय करने में फायर ब्रिगेड को लगे 3 घंटे, सुलग रहा मुरुम गड्ढा

​चारामा (कांकेर)। नगर के मंडी प्रांगण स्थित मुरुम गड्ढे में लगातार हो रही आगजनी की घटनाएं अब स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन चुकी हैं। बीते 8 जून की रात करीब 9:00 बजे एक बार फिर इस विशाल मुरुम गड्ढे में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी भयावह थीं कि पास की घनी बस्तियों, सब्जी मंडी और व्यावसायिक दुकानों पर खतरा मंडराने लगा।


​हैरान करने वाली बात यह रही कि महज 30 किलोमीटर (लगभग 20 मिनट) की दूरी पर स्थित कांकेर जिला मुख्यालय से फायर ब्रिगेड की गाड़ी को चारामा पहुंचने में सवा तीन घंटे का लंबा समय लग गया। रात 9:00 बजे सूचना दिए जाने के बाद दमकल की गाड़ी रात करीब 12:15 बजे मौके पर पहुंची, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका।
​अधिकारियों ने नहीं उठाए फोन, पुलिस और स्थानीय लोग आए आगे
​घटना की गंभीरता को देखते हुए वार्ड पार्षद संदीप मेश्राम ने तत्काल इसकी जानकारी पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी। पार्षद मेश्राम ने बताया कि उन्होंने स्थिति की भयावहता से अवगत कराने के लिए नगर पंचायत सीएमओ, तहसीलदार और एसडीएम तक को फोन लगाया, लेकिन जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों में से किसी ने भी रात में फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।


​सूचना मिलने पर चारामा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान तेज हवाएं चलने और कचरे में सूखे पेड़ होने के कारण आग लगातार दधक रही थी। पुलिस प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने पार्षद संदीप मेश्राम की उपस्थिति में तत्परता दिखाते हुए जैसे-तैसे पानी की व्यवस्था की और आग को आगे फैलने से रोका।
​”जगह नहीं है, इसलिए कचरा फेंकना हमारी मजबूरी” — सीएमओ
​जब इस पूरे मामले और मुरुम गड्ढे को डंपिंग यार्ड बनाने को लेकर नगर पंचायत सीएमओ हेमंत नेताम से सीधा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अपनी बेबसी और व्यवस्था की लाचारी सामने रख दी।
​सीएमओ हेमंत नेताम ने कहा— “चूंकि वर्तमान में नगर पंचायत के पास कचरा डंप करने के लिए कोई उपयुक्त जगह (ट्रेंचिंग ग्राउंड) उपलब्ध नहीं है, इसलिए हमारी मजबूरी है कि नगर का पूरा कचरा, डस्ट और प्लास्टिक इसी मुरुम गड्ढे में डालना पड़ रहा है। जहां तक फायर ब्रिगेड का सवाल है, तो नगर पंचायत की ओर से कई बार शासन को दमकल वाहन और अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन विडंबना है कि शासन स्तर से आज तक हमें इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।


​15 साल की मांग, घोषणाएं अनेक पर धरातल शून्य
​चारामा नगर पंचायत में खुद की फायर ब्रिगेड न होना यहाँ की जनता के लिए सबसे बड़ा अभिशाप साबित हो रहा है। इसके पूर्व भी जब नेशनल हाईवे स्थित ‘मनुज टेलर्स’ की दुकान में भीषण आग लगी थी, तब भी दकमल गाड़ी 2 घंटे की देरी से पहुंची थी। तब तक स्थानीय लोगों ने खुद ही मशक्कत कर आग बुझाई थी, जिससे भारी नुकसान हुआ था।
​नेताओं ने इस पर सिर्फ सियासत की है। चारामा के लिए दमकल वाहन की मांग पिछले 15 वर्षों से की जा रही है। पूर्व विधायक ब्रह्मानंद नेताम, पूर्व विधायक स्वर्गीय मनोज मंडावी और वर्तमान विधायक श्रीमती सावित्री मंडावी द्वारा लगातार विधानसभा और शासन स्तर पर इसकी मांग उठाई गई। लेकिन सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, किसी भी शासन ने इस गंभीर और जीवन-मरण से जुड़ी समस्या पर ठोस ध्यान नहीं दिया।

​जनता में भारी आक्रोश, बड़े हादसे का डर
​घनी आबादी और सब्जी मंडी के पास स्थित इस मुरुम गड्ढे की आग कभी भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। एक तरफ जगह न होने का प्रशासनिक रोना है और दूसरी तरफ शासन की अनदेखी। इस बीच पिस रही है चारामा की आम जनता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक कोई बड़ी जनहानि नहीं हो जाती, तब तक क्या कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन अपनी आंखें नहीं खोलेगा? चारामा की जनता अब आर-पार के मूड में है और जल्द ही इस समस्या का स्थाई समाधान चाहती है।

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