मुंबई। ग्लोबल मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक शेयरों का जो बुलबुला पिछले कुछ समय से फूल रहा था, वह अब फटने लगा है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में चिप शेयरों (सेमीकंडक्टर) में आई भारी गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ‘संजीवनी’ बनने जा रही है। पिछले दो सालों से उतार-चढ़ाव और सुस्ती झेल रहा हमारा ‘निफ्टी’ अब एक घायल शेर की तरह बड़ी छलांग लगाने को पूरी तरह तैयार है।
आखिर क्यों भारत से बाहर गया था विदेशी पैसा?
आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने साल 2025 में $1.66$ लाख करोड़ रुपये और साल 2026 में अब तक लगभग $2.7$ लाख करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाले हैं। दरअसल, यह सारा पैसा भारत से निकलकर अमेरिका के नैस्डैक, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में जा रहा था, जहां सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी एआई चिप कंपनियों ने 200 से 400 प्रतिशत तक का बेतहाशा मुनाफा कमाया था। ज्यादा रिटर्न के लालच में विदेशी निवेशकों ने भारत की 10% की स्थिर कॉरपोरेट विकास दर वाले बाजार को छोड़कर वहां दांव लगाना शुरू कर दिया था।
कर्ज लेकर शेयर खरीदने का खतरनाक खेल
ग्लोबल मार्केट में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह कर्ज लेकर शेयर खरीदना भी है। दक्षिण कोरिया में लोग अपनी बीमा पॉलिसियों पर लोन लेकर चिप शेयर खरीद रहे थे, जबकि ताइवान में शेयरों के लिए पर्सनल लोन लिए जा रहे थे। 5 जून को सेमीकंडक्टर शेयरों में आई भारी गिरावट इसी खतरे की पहली घंटी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही ग्लोबल एआई का यह बुखार उतरेगा, विदेशी पैसा वापस भारतीय बाजार (दलाल स्ट्रीट) का रुख करेगा।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है यह सुनहरा मौका?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरिया और ताइवान जैसे देश सिर्फ एक तकनीक (सेमीकंडक्टर) पर निर्भर हैं, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था बैंकिंग, डोमेस्टिक कंजम्पशन और आईटी जैसे कई मजबूत पिलर्स पर टिकी है। इसके अलावा, पिछले दो सालों की विदेशी बिकवाली के कारण भारतीय शेयर अपने ऐतिहासिक औसत वैल्यूएशन से लगभग 10% सस्ते हो गए हैं। जैसे ही वैश्विक तनाव और बाहरी अनिश्चितताएं कम होंगी, निफ्टी नए रिकॉर्ड स्तरों को छू सकता है।