आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित सुरक्षा बल न केवल स्वयं की सुरक्षा बल्कि आम नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं…राजेश कुकेरजा
रमेश गुप्ता
भिलाई । आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (छसबल) भिलाई में शुक्रवार को एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रथम वाहिनी के उन्नत सेनानी राजेश कुकेरजा ने किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जवानों को भूकंप, बाढ़, आगजनी, भवन ध्वस्त होने जैसी प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए दक्ष बनाना था। एसडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), अग्निशमन उपकरणों के सुरक्षित संचालन, रेस्क्यू तकनीकों तथा आपदा पूर्व तैयारी और सामुदायिक सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में शुरुआती कुछ घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए प्रशिक्षित बलों की भूमिका निर्णायक होती है।
इस अवसर पर उन्नत सेनानी राजेश कुकेरजा ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित सुरक्षा बल न केवल स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि “तैयारी ही बचाव है” और इसी सोच के साथ सभी को सतत प्रशिक्षण एवं अभ्यास करते रहना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वाहिनी के लगभग 170 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत मॉक ड्रिल का भी आयोजन किया गया, जिसमें जवानों ने राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। उन्नत सेनानी कुकेरजा ने स्वयं मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया तथा जवानों को उपकरणों के प्रभावी उपयोग और आपदा प्रबंधन की व्यवहारिक बारीकियों से अवगत कराया।
कार्यक्रम के समापन पर एसडीआरएफ टीम के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से जवानों की कार्यकुशलता और आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बल अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सके।