देश के चारों धाम में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन का संकल्प हुआ पूर्ण

,0 छत्तीसगढ़ में इस तरह का पहला आयोजन 008 जून को अमरकोट में होगा भव्य भंडारा 0दिलीप गुप्ता सरायपाली= नगर के देवसरिया परिवार द्वारा देश के प्रसिद्ध 4 धामों क्रमशः वृंदावन , बद्रीनाथ , द्वारका व रामेश्वरम के बाद अंत में श्री जगन्नाथ पुरी में श्रीमद् भागवत जी कथा का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ । इस श्रीमद् भागवत कथा का समापन आगामी 8 जून को धार्मिक नगरी अमरकोट के श्रीराम मंदिर के विशाल प्रांगण में संपन्न होगा ।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार नगर के धार्मिक देवसरिया परिवार द्वारा देश के 4 अन्य धामों में अमरकोट के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित पद्मलोचन महाराज द्वारा संपन्न कराया गया तो वहीं श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम पड़ाव के तहत ओडिशा के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर में विगत 17 से 24 मई तक08 दिवसीय श्री भगवत कथा का आयोजन किया गया । इन पांचों धामों में कथा आयोजन के पश्चात अमरकोट में आगामी 8 जून को समापन आयोजन किया जा रहा है ।

इस संबंध में इस पांचों धामों में श्री भगवत कथा के आयोजनकर्ता देवसरिया परिवार के सतीश शशि अग्रवाल ने जानकारी देते हुवे बताया कि धर्म, भक्ति और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से देवसरिया गोयल परिवार के श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी सदस्य उनके द्वारा एक अद्भुत एवं दुर्लभ संकल्प की देश के प्रमुख चारों धामों क्रमशः वृंदावन , बद्रीनाथ , द्वारका व रामेश्वरम के साथ ही भगवान जगन्नाथ जी के पावन मंदिर श्री जगन्नाथ पुरी में भी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन संपन्न किया गया । उक्त सभी धामों में इस महान संकल्प की पूर्ति के लिए उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव परम श्रद्धेय पंडित पद्मलोचन महाराज जी से निवेदन किया तथा कथा आयोजन हेतु आग्रह किया था ।

जिसे स्वीकार करते हुवे गुरुदेव पंडित पद्मलोचन महाराज जी ने भी इस पुण्य संकल्प को भगवान की प्रेरणा मानते हुए इसे स्वीकार किया और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से देश के विभिन्न पवित्र तीर्थों में धर्मगंगा प्रवाहित करने का निर्णय लिया था । जिसकी शुरुवात श्री श्री बद्रीनाथ धाम से प्रारंभ किया गया। इस भव्य आयोजन शृंखला का समापन श्री जगन्नाथ पुरी में संपन्न हुई ।इस क्रम में सर्वप्रथम भगवान विष्णु की तपोभूमि श्री बद्रीनाथ धाम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली श्री मथुरा-वृंदावन धाम में कथा का दिव्य आयोजन किया गया। तीसरे चरण में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या धाम में भक्तिरस की अमृतधारा प्रवाहित हुई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की नगरी श्री द्वारकाधीश धाम में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया। पांचवें चरण में भगवान शिव की पावन नगरी श्री रामेश्वर धाम में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।इन सभी आयोजनों के पश्चात अंतिम एवं अत्यंत विशेष कथा आयोजन भगवान जगत के नाथ श्री जगन्नाथ जी की पावन नगरी श्री पुरी धाम में संपन्न हुआ। पुरी धाम की कथा से जुड़ा एक अत्यंत अद्भुत एवं चमत्कारिक प्रसंग भी सामने आया, जिसने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।पुरी धाम में कथा आयोजन से लगभग छह माह पूर्व पूज्य पंडित पद्मलोचन महाराज जी को एक दिव्य स्वप्न का अनुभव हुआ। स्वप्न में स्वयं भगवान जगन्नाथ जी ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि अन्य सभी स्थानों पर कथा करना सरल है, परंतु यदि पुरी धाम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना चाहते हो तो पहले अपने निवास स्थान से पैदल चलकर पुरी धाम आओ और स्वयं भगवान जगन्नाथ को निमंत्रण दो। तभी यहां कथा आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होगा।भगवान जगन्नाथ जी के इस दिव्य आदेश को पाकर पंडित पद्मलोचन महाराज जी ने इसे प्रभु की आज्ञा मानते हुए सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने कठिन यात्रा का संकल्प लिया और अपने निवास स्थान से पैदल यात्रा करते हुए श्री जगन्नाथ पुरी धाम पहुंचे। वहां भगवान जगन्नाथ जी के श्रीचरणों में उपस्थित होकर उन्होंने विधिवत कथा का निमंत्रण अर्पित किया तथा सफल आयोजन हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया।आयोजनकर्ता सतीश शशि अग्रवाल व कथावाचक श्री पद्मलोचन महाराज ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, संत समागम, धार्मिक अनुष्ठान एवं भगवान जगन्नाथ जी की महिमा का गुणगान वातावरण को भक्तिमय बनाता रहा। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अपने जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। संभवतः छत्तीसगढ़ में इस तरह का आयोजन किसी के द्वारा संपन्न नहीं कराया गया होगा । यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत रहेगा कि यदि संकल्प में श्रद्धा, गुरु का मार्गदर्शन और भगवान की कृपा हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता।

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