0-नवा रायपुर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की कवायद, अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू
रायपुर : नई रेल लाइन परियोजना के लिए अब अभनपुर क्षेत्र के 16 गांवों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नवा रायपुर को नई रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने और प्रस्तावित रेलवे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को विकसित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने करीब 518 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को अपनी दावा-आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। इससे पहले मंदिर हसौद क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी और अब परियोजना का विस्तार अभनपुर क्षेत्र तक पहुंच गया है।
रेलवे विभाग के अनुसार यह परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मल्टी ट्रैकिंग योजना का हिस्सा है। प्रस्तावित 248 किलोमीटर लंबी रेल लाइन छत्तीसगढ़ को ओडिशा और महाराष्ट्र से बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगी। अधिकारियों का दावा है कि इसके शुरू होने से माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी, उद्योगों को नई गति मिलेगी और क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं मजबूत होंगी। नवा रायपुर को भी पहली बार व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता साफ होगा।
भूमि अधिग्रहण की जद में अभनपुर क्षेत्र के पलौद, गिरोला, परसदा, खट्टी, अभनपुर, उरला, सारखी, कोलर, खोरपा, ढोंढरा, बेलभाठा, तर्रा, जामगांव, नवागांव, थनौद और खरखराडीह गांव शामिल हैं। इन गांवों से गुजरने वाली नई रेल लाइन के लिए कुल 210.43 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें अभनपुर क्षेत्र की 145.78 हेक्टेयर और गोबरा नवापारा क्षेत्र की 64.65 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कॉरिडोर केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक विकास का बड़ा माध्यम बनेगा। रायपुर, बलौदाबाजार और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को माल परिवहन के लिए नया रेल विकल्प मिलेगा। इससे सीमेंट, इस्पात और अन्य उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत कम होने की संभावना है। परियोजना के पूरा होने पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
करीब 18,658 करोड़ रुपये की लागत वाली इस मल्टी ट्रैकिंग परियोजना में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के 15 जिलों में कुल 1,247 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाना है। छत्तीसगढ़ में इसकी लंबाई 248 किलोमीटर होगी। रेलवे के अनुमान के अनुसार परियोजना के पूरा होने पर प्रतिवर्ष लगभग 22 करोड़ रुपये मूल्य के डीजल की बचत भी होगी।
इस रेल परियोजना का लाभ रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदाबाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिलों को मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने भी इसे विशेष महत्व दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में जिन चार मल्टी ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, उनमें यह परियोजना भी शामिल है।
हालांकि परियोजना को विकास और औद्योगिक विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में दावा-आपत्तियों की सुनवाई और मुआवजा प्रक्रिया इस परियोजना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।