रेलवे स्टेशन के आसपास मौत के अड्डे! संकरी गलियों में होटल-गेस्ट हाउस, सिस्टम बना मूकदर्शक…क्या रायपुर किसी मालवीय नगर जैसे हादसे का इंतज़ार कर रहा है?

रायपुर। दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड ने देशभर को झकझोर दिया है, लेकिन राजधानी रायपुर की स्थिति भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं दिख रही। शहर में सैकड़ों होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और कैफे संचालित हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की हालत बेहद चिंताजनक है।

जनधारा की पड़ताल में रेलवे स्टेशन के आसपास और शहर के अन्य इलाकों में कई ऐसे प्रतिष्ठान सामने आए जहां फायर सेफ्टी के इंतजाम नाकाफी या पूरी तरह अनुपस्थित मिले। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में देखने को मिली, जहां संकरी गलियों में होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। कई मकानों को ही गेस्ट हाउस में तब्दील कर दिया गया है, लेकिन उनके वैध अनुमतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

पड़ताल के दौरान रेलवे स्टेशन क्षेत्र स्थित होटल रायपुर इन की स्थिति भी सवालों के घेरे में दिखाई दी। करीब 15 वर्षों से संचालित इस होटल में फायर सेफ्टी के नाम पर लगाया गया फायर एग्जिट सिस्टम भी करीब एक वर्ष पहले एक्सपायर हो चुका बताया गया। होटल में न स्प्रिंकलर सिस्टम दिखाई दिया, न इमरजेंसी अलार्म और न ही किसी आपदा की स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वर्षों से यहां ठहरने वाले यात्रियों की सुरक्षा किस भरोसे छोड़ दी गई है।

इसी तरह होटल कान्हा की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं मिली। होटल तक पहुंचने के लिए बेहद संकरी गली से गुजरना पड़ता है, जहां किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। होटल वसुंधरा की बिल्डिंग में तो होटल पहली मंजिल पर संचालित है, जबकि नीचे राशन दुकान और भोजनालय संचालित होते मिले। यदि आग जैसी कोई दुर्घटना होती है तो निकासी और बचाव कार्य बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कई प्रतिष्ठानों के बाहर खुले ट्रांसफार्मर, झूलते बिजली के तार और अव्यवस्थित विद्युत कनेक्शन मौजूद हैं। कई स्थानों पर नंगे तार खुलेआम लटकते दिखाई दिए, जो आगजनी जैसी घटनाओं को न्योता देने के लिए पर्याप्त हैं।

राजधानी में लगभग 400 होटल, 650 से अधिक रेस्टोरेंट एवं कैफे और 350 से ज्यादा गेस्ट हाउस संचालित बताए जाते हैं, लेकिन इनमें से कितनों का नियमित फायर ऑडिट हुआ है, इसका स्पष्ट जवाब जिम्मेदार विभागों के पास नहीं है।

राजधानी रायपुर में एक ही फायर सब स्टेशन है अगर कोई घटना घटती है तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में एक घंटा लग जाता है और 6 ही वाहनों की व्यवस्था है ऐसे में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या राजधानी रायपुर किसी बड़े हाथ से से लड़ने के लिए तैयार है।

इस मामले में महापौर मीनल चौबे का कहना है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि निगम को विशेष अभियान चलाकर शहर के सभी होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और कैफे की व्यापक जांच करनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, तब प्रशासन आखिर अब तक क्या कर रहा था? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी? दिल्ली का मालवीय नगर हादसा चेतावनी है। यदि रायपुर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रही तो यह चेतावनी कभी भी त्रासदी में बदल सकती है।

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