रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से जारी तहसीलदारों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है. सरकार के साथ हुई सकारात्मक चर्चा और ठोस आश्वासन के बाद छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने अपना सामूहिक अवकाश का फैसला वापस ले लिया है, जिसके बाद 4 जून से प्रदेशभर के तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट दोबारा काम पर लौटेंगे.
राजापुर उप तहसील विवाद से भड़की थी चिंगारी
यह पूरा विवाद सरगुजा जिले के मैनपाट तहसील के राजापुर उप तहसील से शुरू हुआ था. वहाँ पदस्थ नायब तहसीलदार और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तुषार मानिक के साथ शासकीय कार्य के दौरान मारपीट, अभद्रता और काम में बाधा पहुंचाने की घटना सामने आई थी. इस घटना के विरोध में कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने प्रदेशव्यापी सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान कर दिया था.
सरकार के आश्वासन और FIR के बाद पिघला संघ
विवाद को बढ़ता देख राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री और सचिव के साथ संघ की उच्च स्तरीय बैठक हुई. इस परिचर्चा में संघ ने न केवल आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की, बल्कि तहसीलदारों की सुरक्षा, गाड़ियों की सुविधा, स्टाफ की कमी और कोर्ट के काम के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे गंभीर मुद्दों को भी सामने रखा.
शासन से मिले भरोसे के बाद, सीतापुर थाने में नायब तहसीलदार की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है. मामले के नामजद आरोपी नाजिम रजा और पंकज गुप्ता ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है, जिनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है.
15 दिनों का अल्टीमेटम, नहीं तो फिर थमेंगे काम
संघ ने साफ कर दिया है कि वे आम जनता के हितों और सुशासन को सर्वोपरि मानते हुए 4 जून से राजस्व, कोर्ट, निर्वाचन और जनगणना जैसे सभी प्रशासनिक कार्यों को सामान्य रूप से शुरू कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने सरकार को आगाह भी किया है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर बाकी बचे आरोपियों पर कार्रवाई और उनकी लंबित मांगों पर ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो वे दोबारा कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे.
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने राज्य प्रशासनिक सेवा संघ, पटवारी संघ, राजस्व निरीक्षक संघ और लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ सहित तमाम संगठनों का आभार जताया है.