उर्वरक के लिए जूझते किसानों पर दोहरी मार
राजकुमार मल
भाटापारा- 1200 से 1300 रुपए प्रति घंटा। बीते खरीफ सत्र की तुलना में कल्टीवेशन चार्ज में रिकॉर्ड 200 से 300 रुपए की उछाल ने उर्वरकों के लिए जूझते किसानों की परेशानी दोगुनी बढ़ा दी है।
लाख दावे के बावजूद ईंधन संकट बरकरार है। और यह संकट अब और भी ज्यादा विस्तार लेता नजर आ रहा है क्योंकि खरीफ सत्र के लिए डीजल की मांग निकल चुकी है। लेकिन बड़ी रुकावट उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह तब, जब सरकार पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता के दावे कर रही है।

बढ़ गया कल्टीवेशन चार्ज
बीते खरीफ और गुजरे रबी सत्र में किसानों ने खेतों की जुताई के लिए 1000 रुपए प्रति घंटा की दर पर भुगतान किया था। लेकिन खाड़ी युद्ध के बाद पेट्रोल- डीजल की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता प्रभावित हुई है। असर देश स्तर पर कीमतों पर पड़ा। इसलिए ट्रैक्टर मालिकों को विवशता में कल्टीवेशन चार्ज बढ़ाना पड़ रहा है। ऐसे में नई दर 1200 से 1300 रुपए प्रति घंटा तय की जा चुकी है। इसमें और बढ़त की आशंका इसलिए भी है क्योंकि इच्छित मात्रा में डीजल अभी भी नहीं मिल पा रहा है।
रोपाई पर भी प्रतिकूल असर
घट सकता है रोपा पद्धति से खेती का रकबा क्योंकि खेतों की तैयारी के लिए रोटावेटर की जरूरत पड़ती है। यह काम अच्छी- खासी मात्रा में डीजल की मांग करता है। कल्टीवेशन चार्ज को ही ज्यादा नहीं, बहुत ज्यादा मान रहे किसान रोपा पद्धति से दूरी बना सकते हैं क्योंकि इसके लिए खेत तैयार करने के लिए प्रति घंटा दर 1500 रुपए से आगे जाने की आशंका है।

ब्लैक मार्केटिंग खूब
खाड़ी युद्ध के पूर्व 93 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा डीजल अब 104 रुपए लीटर की दर पर पहुंच चुका है। बढ़त की आशंका अभी भी बनी हुईं हैं। इसलिए ब्लैक मार्केटिंग जैसी स्थितियां मजबूती से बनी हुईं हैं। लाख दावे के बावजूद ब्लैक में 110 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा डीजल खरीदने के लिए ट्रैक्टर मालिक इसलिए विवश हैं क्योंकि खरीफ की तैयारी के बीच किसानों डिमांड कल्टीवेशन के लिए पहुंचने लगी है।