“हनी ट्रैप क्वीन” श्वेता जैन फिर एक्टिव, करोड़ों की ब्लैकमेलिंग का खुलासा


कृष्ण कुमार सिकंदर, रायपुर

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप कांड की मुख्य आरोपी रही श्वेता जैन फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2019 में जिस हनी ट्रैप गिरोह ने राजनीति, नौकरशाही और कारोबारी जगत में भूचाल ला दिया था, उसी गिरोह से जुड़ी श्वेता जैन का नाम अब इंदौर के एक नए ब्लैकमेलिंग और वसूली मामले में सामने आया है। इस घटनाक्रम ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हनी ट्रैप का नेटवर्क अब भी सक्रिय है और क्या इसके तार पुराने प्रभावशाली गिरोहों से जुड़े हुए हैं।


इंदौर में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपए की मांग की गई। इतना ही नहीं, जान से मारने और गोली मारने तक की धमकी भी दी गई। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है,

जिनमें श्वेता जैन, कथित लेडी तस्कर अलका दीक्षित, बीजेपी से जुड़े एल्डरमैन लाखन चौधरी और पुलिस इंटेलिजेंस का प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक सोमवार 18 मई की शाम इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम ने मीनाल रेसीडेंसी से श्वेता जैन को हिरासत में लिया। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए इंदौर लाया गया। पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में श्वेता जैन और अलका दीक्षित के बीच संपर्क के प्रमाण मिले हैं और यह जांच की जा रही है कि कथित वसूली और ब्लैकमेलिंग के खेल में श्वेता की क्या भूमिका थी।


डीसीपी क्राइम राजेश कुमार त्रिपाठी के अनुसार कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़े हुए हैं। उनकी मुलाकात द्वारकापुरी निवासी अलका दीक्षित से हुई थी, जो शराब कारोबार से जुड़ी बताई जा रही है। अलका ने चौहान की मुलाकात लाखन चौधरी से कराई। लाखन का देवास और खंडवा समेत कई इलाकों में प्रॉपर्टी कारोबार बताया जा रहा है। आरोप है कि लाखन चौधरी ने चौहान पर प्रॉपर्टी में निवेश करने और अलका दीक्षित के साथ साझेदारी करने का दबाव बनाया। जब कारोबारी ने प्रस्ताव ठुकरा दिया तो कथित रूप से उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।


शिकायत में कहा गया है कि करीब 20 दिन पहले हितेंद्र सिंह चौहान सुपर कॉरिडोर इलाके में अपनी कार रोककर मोबाइल पर बात कर रहे थे, तभी एक अन्य वाहन वहां पहुंचा। उस गाड़ी में अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप और लाखन चौधरी मौजूद थे। आरोप है कि इन लोगों ने चौहान के साथ मारपीट की और धमकी दी कि यदि उन्होंने साझेदारी नहीं की तो उन्हें गोली मार दी जाएगी। साथ ही कुछ फोटो और वीडियो दिखाकर कहा गया कि सार्वजनिक कर उनकी सामाजिक और कारोबारी छवि बर्बाद कर दी जाएगी। इसके बदले एक करोड़ रुपए की मांग की गई।
घटना के बाद चौहान ने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।

इसके बाद रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की। अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप और लाखन चौधरी को हिरासत में लिया गया। वहीं प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा के घर पर भी छापा मारा गया, जहां से मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार कॉल रिकॉर्ड से यह सामने आया है कि विनोद शर्मा और अलका दीक्षित लगातार संपर्क में थे।
पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि श्वेता जैन और अलका दीक्षित के बीच करीबी संबंध हैं। इसी आधार पर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक कारोबारी को ब्लैकमेल करने का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जिसमें राजनीतिक, कारोारी और प्रशासनिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जाता था।


गौरतलब है कि वर्ष 2019 में सामने आए मध्यप्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप कांड ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। उस समय श्वेता जैन समेत कई महिलाओं पर आरोप लगा था कि वे प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों को अपने जाल में फंसाकर उनके वीडियो और निजी जानकारियों के आधार पर ब्लैकमेल करती थीं।

जांच के दौरान एक डायरी भी सामने आई थी, जिसमें कई रसूखदार लोगों के नाम दर्ज बताए गए थे। उस समय छत्तीसगढ़ के कुछ पूर्व मंत्रियों, अफसरों और प्रभावशाली लोगों के नाम भी चर्चा में आए थे। जांच एजेंसियों ने यह भी संकेत दिए थे कि गिरोह से जुड़े साइबर एक्सपर्ट्स द्वारा छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानीय अधिकारियों को कई वर्षों तक ब्लैकमेल किया गया।


अब इंदौर में सामने आए इस नए मामले ने पुराने हनी ट्रैप नेटवर्क की यादें फिर ताजा कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक इस घटनाक्रम की चर्चा हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2019 के बाद भी यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था और क्या पुराने चेहरे नए तरीकों से फिर सक्रिय हो गए हैं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कर रही है।

मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। वहीं श्वेता जैन की फिर से सक्रियता ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि हनी ट्रैप का यह खेल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि समय-समय पर नए रूप में सामने आता रहा है।

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