अमेरिका की आखिरी पोलियो मरीज मार्था लिलार्ड का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने ओक्लाहोमा में 26 जून को अंतिम सांस ली। मार्था मात्र 5 वर्ष की उम्र से ही आयरन लंग मशीन पर निर्भर थीं। यह मशीन उनके फेफड़ों को सांस लेने में मदद करती थी। डॉक्टर्स ने उन्हें बचपन में केवल 20 साल जीने की उम्मीद दी थी। लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत से इस भविष्यवाणी को गलत साबित कर दिया। मार्था की बहन सिंडी मैकवे का कहना है कि उनकी मौत कोविड-19 के बाद के प्रभावों के कारण हुई है।
आयरन लंग में गुज़ारी ज़िंदगी की जंग
मार्था का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं था। आयरन लंग एक बड़ा सिलेंडर होता था जो उनके शरीर को घेरे रखता था। इस मशीन के अंदर हवा का दबाव उनके फेफड़ों को काम करने के लिए मजबूर करता था। बचपन में उन्हें स्कूल जाने की बहुत कम अनुमति थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने का कठिन फैसला लिया। वे ग्रेड स्कूल में केवल कुछ घंटे ही शारीरिक रूप से उपस्थित हो पाती थीं। बाकी समय घर पर रहकर ही अपनी शिक्षा पूरी करती थीं।
स्कूल से लेकर सफर तक का अनोखा संघर्ष
मार्था ने शॉनी हाई स्कूल में पढ़ते समय फोन सिस्टम का इस्तेमाल किया। वह इंटरकॉम के जरिए अपने शिक्षकों और सहपाठियों से जुड़ी रहती थीं। उनके पिता भी उनकी हिम्मत का पूरा साथ देते थे। वे देश घूमने के लिए एक विशेष गाड़ी यानी कस्टम ट्रेलर का उपयोग करते थे। उनके पिता होटलों में पहले फोन करके दरवाजों की चौड़ाई चेक करते थे। वे सुनिश्चित करते थे कि उनकी बेटी की बड़ी मशीन होटल के अंदर जा सके।
इंटरनेट और प्यार से बदली दुनिया
बाद में इंटरनेट ने मार्था की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने इंटरनेट के जरिए पोलियो और अपनी स्थिति के बारे में गहरी जानकारी हासिल की। थेरेपी की मदद से उन्होंने अपने बाएं हाथ और पैरों में कुछ हलचल भी शुरू कर दी थी। इंटरनेट के माध्यम से ही उनकी मुलाकात मिस्र के रहने वाले बहा साल्ह से हुई। दोनों ने 20 साल तक ऑनलाइन बातचीत की और बाद में विवाह के बंधन में बंधे। इस साल फरवरी में ही वीजा मिलने के बाद उनके पति ओक्लाहोमा पहुंचे थे। उनकी बहन का कहना है कि वे दोनों एक-दूसरे के सच्चे जीवनसाथी थे।