गुवाहाटी। असम से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास करा लिया है। बुधवार को विधानसभा सत्र के आखिरी दिन भारी हंगामे और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच इस ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी मिल गई। इस कानून के लागू होने से अब असम में शादी, तलाक, जमीन-जायदाद के बंटवारे (उत्तराधिकार) और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सभी धर्मों के लोगों पर एक जैसा कानून लागू होगा।

हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक, विपक्ष ने किया विरोध
विधानसभा में जब सरकार ने इस बिल को पटल पर रखा, तो विपक्षी दलों ने इसका जमकर विरोध किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना था कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पास करने के बजाय पहले जांच के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। हालांकि, सरमा सरकार अपने फैसले पर अडिग रही और हंगामे के बीच ही इसे सदन से हरी झंडी मिल गई। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम अब देश का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है, जिसने अपने यहां समान नागरिक संहिता को कानूनी रूप दिया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने दी बधाई, कहा- यह पीएम मोदी का संकल्प
असम में यूसीसी बिल पास होने पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए असम की जनता और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को बधाई दी। अमित शाह ने कहा, “मुझे बेहद खुशी है कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम ने भी यूसीसी विधेयक पारित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा शासित सरकारें देश के हर नागरिक को समानता का अधिकार देने और एक समान कानून लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
इस कानून के आने के बाद अब असम में सामाजिक कुप्रथाओं पर लगाम लगेगी और महिलाओं को कानूनी तौर पर ज्यादा मजबूती मिलेगी। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और इसे सरकार का एक बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है।