बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक बड़े सरकारी अधिकारी पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र (कुकर्म) के सहारे पिछले 35 साल से आबकारी विभाग में नौकरी करने का गंभीर आरोप लगा है। अब यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है。 मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति को फटकार लगाई है और जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का कड़ा आदेश दिया है。
सूचना के अधिकार (RTI) से खुला फर्जीवाड़े का खेल (Bilaspur Excise Officer Fake Caste Certificate Case)
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजेश हेनरी से जुड़ा हुआ है。 भोपाल के रहने वाले प्रभात पांडे ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी。 याचिका में बताया गया कि राजेश हेनरी ने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर यह सरकारी नौकरी हथियाई है。
हैरानी की बात तब सामने आई जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इस मामले के दस्तावेज निकाले गए。 रिकॉर्ड के मुताबिक, इस आबकारी अधिकारी के प्रमाणपत्र पर बिलासपुर तहसील की सील और दस्तखत मौजूद हैं。 लेकिन जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के रिकॉर्ड (दायरा पंजी) में साल 1990-91 के मामलों की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि तहसील दफ्तर में इस नाम के जाति प्रमाणपत्र का कोई केस या रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं है! यानी सील-सिक्के सब फर्जी तरीके से लगाए गए थे।
दो साल से फाइल दबाकर बैठे थे अफसर, अब कोर्ट सख्त (Chhattisgarh High Court Order on Caste Verification)
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने इस फर्जी सर्टिफिकेट की जांच के लिए फाइल दो साल पहले ही बिलासपुर जिला समिति को भेजी थी。 लेकिन विभागीय अफसर रसूख के आगे नतमस्तक होकर दो साल से इस जांच को दबाकर बैठे थे。
मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई。 कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब शिकायत सही जगह पर लंबित है, तो उस पर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों हुई? हाईकोर्ट ने अब सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका देते हुए एक तय समयसीमा के भीतर इस पूरे मामले का निपटारा करने का हुक्म जारी किया है。 इस आदेश के बाद से आबकारी महकमे में हड़कंप मच गया है।