छत्तीसगढ़ का DMF घोटाला: पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, इधर EOW ने पेश किया 5000 पन्नों का चालान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाला मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को देश की सबसे बड़ी अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में सुनवाई करते हुए अनिल टुटेजा की जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट के इस फैसले के बाद टुटेजा लगभग 2 साल और 4 महीने बाद मंगलवार को रायपुर जेल से रिहा होंगे।

एक तरफ जहां अनिल टुटेजा को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ जांच एजेंसी ने कोर्ट में अपनी घेराबंदी और मजबूत कर दी है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आज इस घोटाले में दूसरा पूरक चालान कोर्ट में पेश कर दिया है।

कोर्ट में पहुंचा 5 हजार पन्नों का पूरक चालान (Chhattisgarh DMF Scam EOW Chargesheet)

जांच एजेंसी EOW ने विशेष न्यायाधीश की अदालत में पूर्व IAS अनिल टुटेजा और सतपाल सिंह छाबड़ा के खिलाफ करीब 5,000 पन्नों का यह पूरक चालान जमा किया है। इस भारी-भरकम दस्तावेज में पैसों के लेन-देन, गवाहों के बयान और कई अहम दस्तावेजी सबूत शामिल हैं।

DMF फंड के इस्तेमाल में हुई गड़बड़ियों को लेकर जांच एजेंसियां लगातार नए खुलासे कर रही हैं। माना जा रहा है कि इस नए चालान के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।

समझिए क्या है यह पूरा DMF घोटाला? (What is Chhattisgarh DMF Scam)

यह पूरा मामला कोरबा और अन्य आदिवासी जिलों में माइनिंग फंड के टेंडर आवंटन में हुए बड़े भ्रष्टाचार से जुड़ा है। ईडी (ED) की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने इस मामले में धोखाधड़ी और साजिश का केस दर्ज किया था।

जांच में सामने आया है कि सरकारी टेंडरों को अपने चहेते ठेकेदारों और बिचौलियों को बांटकर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया गया। इस पूरे खेल में अफसरों और नेताओं को तगड़ा कमीशन बांटा गया था।

40% तक बंटता था कमीशन, नियमों में किया फेरबदल

जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है कमीशन का गणित। कोरबा में हुए करीब 575 करोड़ रुपये के इस घोटाले में अकेले कलेक्टर का कमीशन 40 प्रतिशत फिक्स था। इसके अलावा सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब-इंजीनियर को 2% तक का कमीशन मिलता था।

कमीशन खोरी के इस धंधे को चमकाने के लिए अफसरों ने विकास कार्यों के नियमों में भी बदलाव कर दिया था। जानबूझकर ऐसी कैटेगरी जोड़ी गईं जिनमें ज्यादा से ज्यादा कमीशन मिल सके, जैसे खेल सामग्री, मेडिकल उपकरण और ट्रेनिंग प्रोग्राम।

ठेकेदारों ने इस रिश्वत की रकम को छिपाने के लिए कई फर्जी फर्में बनाई थीं। जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने 76.50 लाख रुपये कैश बरामद किए थे और कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था। फिलहाल अनिल टुटेजा की जमानत के बाद इस केस में नया मोड़ आ गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *