मौत का अलार्म: खैरागढ़ में पेड़ की डाल गिरी, इंदौर-दिल्ली जैसी बड़ी त्रासदी से बाल-बाल बचा चालक

खैरागढ़: सड़क पर सुरक्षा केवल हेलमेट या सीट बेल्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सरकारी विभागों की जिम्मेदारी भी है जो सड़क किनारे खड़े खतरों को नजरअंदाज करते हैं। शुक्रवार रात डोंगरगढ़-खैरागढ़ मार्ग पर अमलीडीह खुर्द के पास जो हुआ, वह प्रशासनिक सुस्ती का जीता-जागता उदाहरण है। एक चलती कार पर अचानक पेड़ की विशाल डाल गिर गई, जिससे कार का पिछला हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया। गनीमत रही कि पटवारी दिव्यांश राजपूत अकेले सफर कर रहे थे और उनकी जान बच गई।

यह हादसा महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि व्यवस्था की पुरानी लापरवाही का परिणाम है। जानकारी के अनुसार, शाम करीब 8:30 बजे एक ओवरलोड ट्रक ने सड़क किनारे खतरनाक तरीके से झुकी पेड़ की डाल को टक्कर मार दी, जिससे वह पीछे आ रही कार पर जा गिरी। स्थानीय लोग लंबे समय से इन झुके और सूखे पेड़ों को हटाने की मांग कर रहे थे, लेकिन विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में सोया रहा।

हाल ही में हमने इंदौर और दिल्ली जैसे शहरों में देखा है कि कैसे तकनीक और लापरवाही मिलकर मौत का फंदा बन जाती हैं। इंदौर में इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान लगी आग और स्मार्ट लॉक जाम होने से 8 लोगों की जान चली गई। वहीं दिल्ली में भी एसी ब्लास्ट के बाद सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम ने लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया और 9 लोगों की मौत हो गई। खैरागढ़ की यह घटना भी उसी कड़वे सच को दोहराती है कि चाहे वह घर के भीतर का डिजिटल लॉक हो या सड़क किनारे का सूखा पेड़, वक्त पर की गई सावधानी ही जान बचा सकती है।

खैरागढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है कि क्या प्रशासन हमेशा लहू बहने का इंतजार करेगा? स्थानीय नागरिकों की मांग जायज है कि पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट हो और उन सभी पेड़ों की छंटाई की जाए जो राहगीरों के लिए काल बनकर खड़े हैं। यह मार्ग केवल सड़क नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों का सफर है, जिसे फाइलों में दबी शिकायतों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।

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