भक्तिमय माहौल में संपन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन की महिमा; भगवान के अनन्य विवाह प्रसंग ने मोहा भक्तों का मन

चारामा
स्थानीय खत्री निवास स्थान चारामा में आयोजित माँ हिंगलाज माता जगराता एवं श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन आज श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचक पं. कृष्णदत्त दुबे (नगर पुरोहित, चारामा) के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही ज्ञान गंगा में गोता लगाने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
​आज की कथा का मुख्य प्रसंग
​कथा के सातवें दिन, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष सप्तमी पर भगवान के ‘अनन्य विवाह’ और ‘सुदामा चरित्र’ का मर्मस्पर्शी वर्णन किया गया।
​विवाह प्रसंग: जैसे ही भगवान के विवाह का प्रसंग शुरू हुआ, पूरा कथा पंडाल भजनों और जयकारों से गूंज उठा। सजीव झांकियों के माध्यम से दर्शाए गए इस प्रसंग ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
​सुदामा चरित्र: पं. दुबे जी ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति और निस्वार्थ प्रेम ही ईश्वर को पाने का एकमात्र मार्ग है। सुदामा की दीनता और कृष्ण की उदारता के प्रसंग को सुनकर कई भक्तों की आँखें नम हो गईं।
​आयोजन की झलकियाँ
​खत्री परिवार (श्रीमती इमरती मोती लाल खत्री एवं समस्त परिवार) द्वारा आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन सुबह 07 से 09 बजे तक संस्कृत मूल पाठ और दोपहर 02 से शाम 06 बजे तक कथा का वाचन किया जा रहा है।
​आयोजक समिति के सदस्यों—ऋषि कुमार, कैलाश कुमार, हेमन्त कुमार और किशोर कुमार खत्री—ने बताया कि आगामी 10 मई को गीता हवन एवं पूर्ण आहुति के साथ इस भव्य आयोजन का समापन होगा। आज की कथा के अंत में महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।

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