नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सोमवार, 4 मई को जारी गिनती में भारतीय जनता पार्टी करीब 200 सीटों पर बढ़त बनाकर बहुमत के जादुई आंकड़े (148) को पार कर चुकी है। पड़ोसी मुल्क के प्रमुख अखबार ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ इस घटनाक्रम को केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र के भविष्य के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। बांग्लादेशी मीडिया का विश्लेषण है कि यदि बंगाल जैसे राज्य में हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण सफल होता है, तो यह भारतीय राजनीति के बुनियादी ढांचे में एक स्थायी बदलाव का प्रतीक होगा।
वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम हटने और सुरक्षा बलों की तैनाती पर उठे सवाल
बांग्लादेशी अखबारों ने इस चुनाव की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की है। ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में बंगाल की वोटर लिस्ट से लगभग 91 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में नागरिक अपने मताधिकार से वंचित रह गए। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय बलों की अभूतपूर्व तैनाती और वोटर लिस्ट की इस कवायद ने चुनाव आयोग की साख पर सवाल खड़े किए हैं। लेखों में चेतावनी दी गई है कि टीएमसी जैसी कैडर-आधारित पार्टी की हार उसके अस्तित्व के लिए संकट पैदा कर सकती है, क्योंकि विचारधारा के अभाव में उसके कार्यकर्ता सत्ता के नए केंद्र यानी बीजेपी की ओर पलायन कर सकते हैं।