भारतमाला परियोजना के तहत हुए जमीन अधिग्रहण घोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में खुलासा हुआ है कि इस भ्रष्टाचार का आकार 100 करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा है। जांच का दायरा छत्तीसगढ़ के 11 से अधिक जिलों तक फैल गया है। मामले में मुख्य रूप से यह बात सामने आई है कि जमीन अधिग्रहण की गोपनीय सूचनाओं को पहले ही लीक कर दिया गया था। इसके बाद बिचौलियों ने सस्ते दामों पर जमीनें खरीदीं और राजस्व अधिकारियों की मदद से दस्तावेजों में बदलाव कर करोड़ों का मुआवजा हासिल किया।
इस घोटाले की कड़ियां मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी होने के कारण ईडी ने हाल ही में रायपुर, भिलाई, बिलासपुर और कोरबा समेत 17 स्थानों पर छापेमारी की है। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में सोना, हीरे के आभूषण और नकदी बरामद होने की सूचना है। विशेष रूप से बिलासपुर और धमतरी के कारोबारी जांच के केंद्र में हैं, जिन्होंने किसानों के नाम पर जमीनें खरीदकर बड़ा खेल किया। जांच एजेंसी अब जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल फोन के डेटा को खंगाल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इन साक्ष्यों के जरिए नौकरशाही और राजनीति से जुड़े कई रसूखदार चेहरों की संलिप्तता उजागर हो सकती है।