“रायपुर में ‘रिहैब’ के नाम पर मौत का कारोबार! 2050 सेंटर में गंभीर मरीजों की ज़िंदगी से खिलवाड़”

बिना लाइसेंस इलाज? कैंसर मरीज की डेड बॉडी से उठे सवाल—क्या स्वास्थ्य व्यवस्था माफियाओं के हवाले?

राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे खेल का एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रायपुरा चौक के पास स्थित 2050 रिहैब सेंटर अब गंभीर आरोपों के घेरे में है। आरोप है कि यहां रिहैबिलिटेशन के नाम पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज किया जा रहा है—वो भी बिना वैध लाइसेंस और जरूरी सुविधाओं के।

सबसे सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब एक वीडियो में कथित तौर पर एक कैंसर मरीज की डेड बॉडी को रिहैब सेंटर से बाहर ले जाते देखा गया। सवाल सीधा है—जब यह केवल “रिहैब सेंटर” है, तो यहां कैंसर जैसे गंभीर मरीज का इलाज कैसे और किस आधार पर किया जा रहा था?

सूत्रों का कहना है कि यह सेंटर उड़ीसा की एक कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा है, लेकिन यहां न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर भी उठता है—क्या इस पूरे मामले की जानकारी CMHO को थी? जब मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया, तो सीएमएचओ ने जांच की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

लेकिन सवाल यही है—क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद ही जांच होगी?
क्या राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य सेवाएं अब माफियाओं के हवाले हो चुकी हैं?

गौरतलब है कि इससे पहले भी मित्तल हॉस्पिटल, ग्लोबल स्टार हॉस्पिटल, उर्मिला हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल जैसे कई संस्थानों की अनियमितताओं को उजागर किया जा चुका है। अब 2050 रिहैब सेंटर का मामला सामने आना यह साबित करता है कि शहर में “इलाज” के नाम पर बड़ा खेल जारी है।

आज की जनधारा टीम लगातार इन मामलों को सामने लाकर व्यवस्था की हकीकत उजागर कर रही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

क्योंकि यहां सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी का है…!

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