पिथौरा। कृषि आदान व्यापारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आगामी खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा। इससे कृषि उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है और किसानों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार को भेजे ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। व्यापारियों का कहना है कि एक्सपायर्ड कीटनाशकों को कंपनियों द्वारा वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए, ताकि डीलरों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
इसके अलावा नए बीज अधिनियम और प्रस्तावित कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलरों को ‘प्रथम पक्ष’ बनाए जाने के प्रावधान को शिथिल करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों पर कानूनी दबाव बढ़ेगा।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में किसान झूठी शिकायतें कर व्यापारियों को ब्लैकमेल करते हैं। ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई करने के बजाय जिला स्तर पर जांच कमेटी गठित कर उसकी अनुशंसा के बाद ही कार्रवाई करने का प्रावधान लागू किया जाए।
लाइसेंस निलंबन के मामलों में भी व्यापारियों ने राहत की मांग की है। उनका कहना है कि छोटी-छोटी वजहों से लाइसेंस निलंबित कर दिए जाते हैं, ऐसे में 21 दिन के भीतर स्वतः बहाली का प्रावधान होना चाहिए।
इसके साथ ही हर वर्ष कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (PC) जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त करने और खाद-बीज लाइसेंस की अवधि 5 वर्ष तथा कीटनाशक लाइसेंस को आजीवन बनाए रखने के अनुरूप प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग की गई है।
व्यापारियों ने दोहरी लाइसेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई राज्यों में अनाज और उद्यानिकी बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की व्यवस्था है, जबकि बीज अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने केंद्र के उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय और कृषि मंत्रालय से आग्रह किया है कि एक माह के भीतर इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे मजबूरी में अनिश्चितकालीन बंद का सहारा लेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित अधिकारियों की होगी।

