कांकेर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती सख्ती और मुठभेड़ों के बाद माओवादियों के खेमे में भारी दहशत का माहौल है. तेलंगाना कैडर की नक्सली रूप के खात्मे के बाद अब उत्तर बस्तर इलाके में सक्रिय नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है. इसी क्रम में नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है जब परतापुर एरिया कमेटी के सक्रिय सदस्य दासरू ने सोमवार को आमाबेड़ा थाने पहुंचकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस अधीक्षक निखिल राखेछा ने इस सरेंडर की पुष्टि करते हुए इसे नक्सलवाद की गिरती साख का प्रमाण बताया है.
खौफ के बीच मुख्यधारा की ओर कदम
शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दासरू ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया जिसके बाद उसे तत्काल 25,000 रुपये की प्रारंभिक प्रोत्साहन राशि नगद प्रदान की गई है. सरकार की योजना के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सली को आने वाले तीन वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा ताकि वह समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ रह सके. इसके अलावा उसे निःशुल्क आवास, भोजन, कृषि भूमि और कौशल विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं भी दी जाएंगी. पुलिस का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण से बचे हुए नक्सलियों पर भी मुख्यधारा में लौटने का मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा.