छत्तीसगढ़ के सक्ती में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद अब सियासी और औद्योगिक जगत में घमासान शुरू हो गया है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद और बड़े उद्योगपति नवीन जिंदल खुलकर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के समर्थन में उतर आए हैं। जिंदल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अग्रवाल के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर कड़े सवाल उठाते हुए इसे अनुचित करार दिया है।
प्रशासनिक कार्रवाई और नवीन जिंदल का बचाव
नवीन जिंदल ने अपनी पोस्ट में छत्तीसगढ़ की इस त्रासदी को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के लिए उचित मुआवजे और निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि उन्होंने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई है कि किसी भी जांच के पूरा होने से पहले ही अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में शामिल कर लिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि अग्रवाल एक साधारण परिवार से उठकर वैश्विक स्तर पर उद्योग स्थापित करने वाले व्यक्ति हैं और प्लांट के दैनिक संचालन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
निजी और सरकारी क्षेत्र के लिए अलग मानक पर उठाए सवाल
सांसद ने सरकार और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल दागते हुए कहा कि जब सरकारी उपक्रमों (PSU) या रेलवे में बड़े हादसे होते हैं, तो कभी भी उनके चेयरमैन के खिलाफ इस तरह का मामला दर्ज नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की है कि यही मानक निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए और पहले सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जिंदल के मुताबिक विकसित भारत के विजन के लिए निवेशकों का सिस्टम पर भरोसा होना जरूरी है और बिना ठोस आधार के की गई ऐसी कार्रवाई उद्योगों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।