-डॉ. सुधीर सक्सेना
चौदह दिनों का युद्धविराम खतरे में है। कोई नहीं जानता कि अमन का चौदहवीं का चाँद किस हद तक रक्तरंजित होगा, लेकिन मध्यपूर्व में भीषण जंग के महत्वपूर्ण पक्ष इस्रायल ने पहले ही दिन अपनी हिंसक करतूत से सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया है। इस्रायल ने सीजफायर को धता बताते हुए लेबनान के दक्षिणी हिस्से पर धुआंधार बमबारी की है। इस बमबारी में उसने रिहायशी बस्तियों और शवयात्रा को भी नहीं बख्शा है और हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम को मार गिराने का दावा किया है। इस्रायल की दिनदहाड़े की गई इस ढीठ कार्रवाई ने ईरान को आगबबूला कर दिया है। और उसने होर्मुज-जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर उसे फिर से बंद कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के दरम्यां चौदह दिनी सीजफायर के ऐलान के बाद इस्रायली कार्रवाइयाँ बताती हैं कि उसे सीजफायर रास नहीं आया है, लिहाजा वह रोड़े अटकाने में लिप्त है। इससे उसके ‘स्टैंड’ को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं। ट्रंप ने बीबी (नेतन्याहू) के इस तर्क की तस्दीक की है कि शायद पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम का पक्षधर नहीं है, किंतु शहबाज और मुनीर इसके सर्वथा उलट तर्क दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम पर हामी भले ही भर दी हो, किंतु वह अभी भी बीबी के दबाव में हैं। इसकी पुष्टि इससे होती है कि उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने इस्लामाबाद में 10 अप्रैल से होने वाली वार्ता में शिरकत से इंकार कर दिया है।
ट्रंप ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है, किंतु असलियत यह है कि नरमपंथी वांस ईरान और अमेरिका के बीच सुलह पर हामी भर सकते हैं। गौरतलब है कि वांस ने लड़ाई छिड़ने के चंद घंटे पहले ही हंगरी में अपने बयान में आक्रमण के खिलाफ राय व्यक्त की थी। यह भी उल्लेखनीय है कि इस्लामाबाद में प्रारंभिक बातचीत में अराघाची और गालीबफ ने कुश्नर और विटकोफ के बजाय वांस से बातचीत की मंशा जताई थी। वार्ता में ट्रंप ते दामाद कुश्नर की मौजूदगी को लेकर उन्होंने नाराजगी का भी इजहार किया था। ऐसे में संधि-वार्ता में मेज पर अमेरिकी पक्ष में कौन बैठता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
युद्धविराम के उल्लंघन का सिरा पकड़ कर आगे बढ़े तो स्पष्ट है कि इस्रायल ‘ग्रेटर इस्रायल’ की स्थापना में कोई कोर-कसर नहीं उठा रखना चाहता है। बाइबिल से उपजी उसकी इस अवधारणा में नील नदी से लेकर फरात तक का क्षेत्र सम्मिलित है। इसे मानें तो वर्तमान इस्रायल के अलावा फिलिस्तीन, लेबनान, जॉर्डन, सीरिया, इराक और सऊदी अरब के हिस्से भी इसमें समा जाते हैं। इसके तहत गोलान हाइट्स, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी का विशेष सामरिक महत्व है।
यह तय है कि अगर तेल अवीव ने अड़ियल रवैया अपनाया, तो सुलह की बात सिरे नहीं चढ़ेगी। उसे इसकी चिंता नहीं है कि होलोकॉस्ट से यहूदियों ने जो वैश्विक सहानुभूति, विश्वास और प्रेम अर्जित किया था, उसे वे गंवा चुके हैं। उधर धर्मतंत्र के बावजूद ईरान ने दृढ़ता और साहसिकता से नई छवि अर्जित की है। डेढ़ करोड़ ईरानियों का शहादत के लिए पंजीयन, लाखों ईरानियों का मानव श्रृंखला बनाना और ईरानी फिल्म निर्माता जफर पनाही का युद्ध की लपटों के बीच वतन लौटना मानीखेज है।
बारूदी धुएँ और धमाकों के बीच अली धमसारी का बिजली संयंत्र में तारों पर छेड़ा गया अमन का राग सदियों तक फिजा में गूंजता रहेगा। इस घटनाक्रम का एक क्षेपक यह भी है कि यूएनओ में फ्रांस के वीटो के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों बरसों से तेहरान में कैद अपने तीन नागरिकों को रिहा कराने में कामयाब रहे हैं।