रमेश गुप्ता : भिलाई । फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर 20 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले राजस्थान के अंतर्राज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना सुपेला एवं एसीसीयू की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से नगदी, मोबाइल, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड सहित बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
मामले का खुलासा करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने बताया कि प्रार्थी यश बत्रा निवासी सुंदर नगर भिलाई ने थाना सुपेला में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी कंपनी साईराम व्हील्स प्रायवेट लिमिटेड के बैंक खाते से अज्ञात व्यक्तियों ने कंपनी डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार किया और विश्वास में लेकर एचडीएफसी बैंक खाते में 20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

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व्हाट्सएप ग्रुप की प्रक्रिया का उठाया फायदा
पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी के तीनों डायरेक्टरों के बीच राशि लेनदेन के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित था, जिसमें विभिन्न ब्रांचों की जरूरत के अनुसार रकम भेजने संबंधी संदेश डाले जाते थे। किसी भी डायरेक्टर की सहमति मिलने पर अकाउंटेंट द्वारा राशि ट्रांसफर की जाती थी। आरोपियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए फर्जी डीपी और मैसेज के जरिए ठगी की वारदात को अंजाम दिया।
तीन टीमों का गठन, तकनीकी जांच से मिली सफलता
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना सुपेला और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित कर तकनीकी जांच शुरू की गई। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, संदिग्ध बैंक खातों और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच में पता चला कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाकर और खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर साइबर ठगी की रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर नकद निकासी करते थे। आरोपी व्हाट्सएप एवं जंगी ऐप के माध्यम से “टोकन सिस्टम” से रकम का लेनदेन करते थे।
होटल छोड़कर किराए के मकानों में छिपने की फिराक में थे आरोपी
पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी रायपुर स्थित तनिष्क होटल राठौर चौक में ठहरे हुए हैं। इसी दौरान उन्हें पुलिस की गतिविधियों की भनक लग गई और वे लगातार ठिकाने बदलने लगे। आरोपी रायपुर शहर में किराए के मकान तलाश रहे थे ताकि छिपकर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते रहें।
पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी पंकज शर्मा सहित कुछ आरोपियों को रायपुर जय स्तंभ चौक के पास संदिग्ध अवस्था में पकड़ा, जबकि अन्य आरोपी बूढ़ा तालाब क्षेत्र में किराए का मकान तलाशते हुए गिरफ्तार किए गए।
राजस्थान से आकर करते थे साइबर ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे राजस्थान से अलग-अलग शहरों में आकर होटल और किराए के मकानों में ठहरते थे तथा पहचान छिपाकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। आरोपी पंकज शर्मा ने बताया कि राजस्थान के लोगों के आधार कार्ड में स्थानीय पता अपडेट कराकर रायपुर में बैंक खाते खुलवाए जाते थे और उन्हीं खातों का उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर एवं निकासी में किया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि 20 लाख रुपये की ठगी की रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर छिपाने का प्रयास किया गया था, लेकिन दुर्ग police की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी विश्लेषण से गिरोह का पर्दाफाश हो गया।
जब्त सामग्री
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपये नगद, 6 मोबाइल फोन, 10 डेबिट कार्ड, 4 पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, चेकबुक, पासबुक, सिम कार्ड, डिपॉजिट स्लिप और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने इस मामले में राजस्थान निवासी छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुरली जनागल, गोपाल सोनी, मोती सिंह, मोतीलाल शर्मा, बनवारी शर्मा और पंकज शर्मा शामिल हैं।
संयुक्त टीम की रही अहम भूमिका
पूरे मामले के खुलासे में थाना सुपेला पुलिस एवं एसीसीयू यूनिट की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और लगातार निगरानी के जरिए गिरोह को पकड़ने में सफलता हासिल की।