मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का मामला सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल बन गया है। सालों पुराने एफडी घोटाले में दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया है। अब सबकी निगाहें 2 अप्रैल को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं, जो उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनकी विधायकी जाएगी? इसका जवाब सीधे तौर पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 में छिपा है। कानून के मुताबिक, यदि किसी जनप्रतिनिधि को 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इतना ही नहीं, सजा पूरी होने के बाद भी 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती है। ऐसे में यदि भारती को 2 साल से ज्यादा की सजा मिलती है, तो दतिया सीट पर उपचुनाव तय माना जाएगा।

राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि 2023 के चुनाव में भारती ने भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर किया था। तीन बार हार झेल चुके भारती ने उस चुनाव में जीत दर्ज कर अपनी सियासी पकड़ मजबूत की थी, लेकिन अब वही जीत संकट में पड़ती नजर आ रही है।

यह पूरा मामला करीब 25 साल पुरानी एक एफडी से जुड़ा है। वर्ष 1998 में भारती की मां ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। उस समय भारती बैंक के अध्यक्ष भी थे और जिस संस्था के नाम पर एफडी थी, उससे भी जुड़े हुए थे। आरोप है कि उन्होंने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर एफडी की अवधि में हेरफेर कर इसे 3 साल से बढ़ाकर 15 साल तक कर दिया, ताकि ऊंचे ब्याज का फायदा लंबे समय तक लिया जा सके। इस दौरान वर्षों तक बैंक को नुकसान होता रहा।
बाद में ऑडिट में यह गड़बड़ी सामने आई और 2015 में मामला अदालत पहुंचा। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है। हालांकि, भारती पक्ष ने साफ किया है कि सजा के बाद वे हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
अब सब कुछ अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर है। अगर सजा कम हुई तो राहत मिल सकती है, लेकिन 2 साल से ज्यादा की सजा उनकी विधायकी और राजनीतिक करियर दोनों के लिए बड़ा झटका साबित होगी। दतिया की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।