बीजापुर | पामेड़ क्षेत्र में विकास की नई शुरुआत, पहली बार मोबाइल नेटवर्क शुरू

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बीजापुर | पामेड़ क्षेत्र में विकास की नई शुरुआत, पहली बार मोबाइल नेटवर्क शुरू
बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित पामेड़ क्षेत्र में विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सलियों के गढ़ और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस इलाके में अब सुरक्षा और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
22 जनवरी 2025 को 199वीं बटालियन सीआरपीएफ द्वारा यहां सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदली है। सुरक्षा बलों ने न केवल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की, बल्कि जनकल्याण से जुड़े कई कार्य भी किए। इस दौरान लगभग 60-70 आईईडी (बारूदी सुरंग) को खोजकर निष्क्रिय किया गया, जिससे आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा।
मोबाइल नेटवर्क की बड़ी सौगात
31 मार्च 2026 को पामेड़ में पहली बार मोबाइल टावर स्थापित किया गया, जिससे करीब 15 गांवों में नेटवर्क कनेक्टिविटी पहुंची। अब तक डिजिटल रूप से कटे हुए इस क्षेत्र के लोगों को पहली बार बाहरी दुनिया से सीधे जुड़ने का मौका मिला है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और आपातकालीन सेवाओं में बड़ा सुधार होगा।
सड़क, स्वास्थ्य और राशन सुविधा में सुधार
क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ना एक बड़ी उपलब्धि रही
ग्रामीणों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं
कैंप के पास बस स्टॉप बनने से आवागमन आसान हुआ
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से ग्रामीणों को राहत मिली
पहले लोगों को राशन लेने के लिए दूर गंगालूर जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव के पास ही मिल रही है।
सामाजिक जुड़ाव और युवाओं में बदलाव
सीआरपीएफ द्वारा चलाए गए सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत बर्तन, कपड़े, दवाइयां, खेल सामग्री, साइकिल आदि वितरित किए गए। इसके साथ ही स्थानीय मेलों और खेल आयोजनों में भागीदारी से ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास बढ़ा है।

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