रायपुर, 25 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के उन्मूलन हेतु संचालित अभियान को आज एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इस घटनाक्रम को बस्तर क्षेत्र में शांति, विश्वास और विकास की पुनर्स्थापना की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के विरुद्ध एक निर्णायक प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती पर अब हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है और माओवाद अपने अंतिम पड़ाव पर है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि वर्षों तक भय का वातावरण निर्मित करने वाली शक्तियां अब समाप्त हो रही हैं और क्षेत्र तेजी से विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार की पुनर्वास केंद्रित और संवेदनशील नीतियों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की नीतियों के कारण ही भटके हुए युवाओं का मुख्यधारा पर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस तथ्य का प्रमाण है कि सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलने पर लोग हिंसा का मार्ग त्याग कर विकास को अपना रहे हैं। वर्तमान में बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्रों में हो रहे कार्यों ने जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। साथ ही, उन्होंने विषम परिस्थितियों में कार्य कर रहे सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और उनकी सटीक रणनीतिक कार्रवाई की भी मुक्तकंठ से सराहना की।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति और प्रगति की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के सबसे सुरक्षित और समृद्ध राज्यों की सूची में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। इस आत्मसमर्पण के बाद अब समर्पित नक्सलियों के पुनर्वास हेतु निर्धारित शासकीय प्रक्रियाओं के तहत आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।