हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता और न्याय करने वाला धर्मराज माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यमराज की सत्ता पूरे संसार पर चलती है, लेकिन एक ऐसे भी हैं जिन पर उनका कोई अधिकार नहीं है। वे हैं संकटमोचन हनुमान जी। भक्तों के बीच यह विश्वास है कि यमराज भी हनुमान जी के सामने नतमस्तक हैं।
चिरंजीवी होने का विशेष वरदान
हिंदू धर्म शास्त्रों में 8 चिरंजीवियों यानी अमर रहने वाले महापुरुषों का वर्णन है। इनमें हनुमान जी का नाम प्रमुख है। माना जाता है कि हनुमान जी कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर ही निवास करेंगे। यही कारण है कि मृत्यु के देवता यमराज का उन पर कोई वश नहीं चलता है। चिरंजीवी होने का अर्थ है जिसे कोई समाप्त न कर सके और जो सदैव अजेय रहे।

जन्म से नहीं, भक्ति से मिला आशीर्वाद
यह एक आम धारणा है कि हनुमान जी को अमरता जन्म से ही प्राप्त थी, लेकिन सत्य कुछ और है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी को यह दिव्य आशीर्वाद उनके असाधारण बचपन और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के बाद प्राप्त हुआ था। भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन पर कृपा की, जिसके बाद वे अजेय और अमर हो गए।
मौत को भी हराने वाली शक्ति
हनुमान जी की शक्ति इतनी अद्भुत है कि उन्हें कोई भी लौकिक या दैवीय ताकत पराजित नहीं कर सकती है। उनकी भक्ति और शक्ति का स्वरूप इतना विशाल है कि स्वयं मृत्यु भी उनके सामने बेबस है। इसी कारण भक्त उन्हें संकटमोचन मानते हैं और उनका स्मरण करते हैं।