1 मई से होगी मकानसूचीकरण का कार्य पूर्णतः डिजीटल एप से
भानुप्रतापपुर ।जिला जनगणना अधिकारी और कलेक्टर कांकेर के निर्देशानुसार और अनुविभागीय अधिकारी रा गंगाधर वाहिले के मार्गदर्शन में आज भानुप्रतापपुर चार्ज ग्रामीण के प्रगणक सुपरवायजरों का प्रशिक्षण संस्कार वैली स्कूल भानुप्रतापपुर में प्रारंभ हुआ। आज के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए एसडीएम गंगाधर वाहिले ने कहा कि पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण का होगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में परिवार और व्यक्तियों की गणना के लिए होगा।इस काम को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्लाक में 205 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक प्रगणक को औसतन 700 से 800 लोगों, यानी लगभग 250 से 300 परिवारों की गणना का कार्य सौंपा गया है।तहसीलदार एवं चार्ज अधिकारी सुरेंद्र उर्वशा ने कहा कि 50-50 कर्मियों को तीन दिनों का प्रशिक्षण जनगणना 2027 के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 अप्रैल से शुरू हो चुका है। यह 24 अप्रैल तक चलेगा कुल 205 अधिकारी कर्मचारी को तीन बैच में तीन तीन दिन प्रशिक्षण दिया जावेगा। प्रशिक्षण का समय सुबह 9ः30 बजे से शाम 5ः30 बजे तक निर्धारित है।

डिजिटल एप से होगा पूरा काम
मास्टर ट्रेनर्स टिकेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। प्रगणकों को मोबाइल एप के माध्यम से डेटा संग्रह करना होगा। प्रशिक्षण में उन्हें एप इंस्टॉल करने, लॉगिन करने, डेटा एंट्री और नियमित सिंकिंग की पूरी प्रक्रिया सिखाई जा रही है।प्रगणकों को अपने क्षेत्र का मानचित्र सत्यापित करना, मकानों की नंबरिंग करना और हर घर जाकर जानकारी दर्ज करनी होगी। साथ ही डेटा में किसी प्रकार की त्रुटि या दोहराव से बचने के लिए अंतिम समीक्षा भी अनिवार्य होगी।
पर्यवेक्षकों की अहम भूमिका
पर्यवेक्षक पूरे क्षेत्र की निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी मकान या परिवार छूटे नहीं। वे प्रत्येक प्रगणक की प्रगति पर नजर रखेंगे और डेटा में त्रुटियों को सुधारने के निर्देश देंगे। साथ ही यदि किसी क्षेत्र की सीमा में बदलाव होता है, तो इसकी जानकारी तत्काल चार्ज अधिकारी को दी जाएगी।
सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी
जनगणना 2027 में नागरिकों को पहली बार सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी गई है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।ऑनलाइन जानकारी भरने के बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में प्रगणकों को दिखाना होगा। इससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और आसान होगी।
गोपनीयता पर विशेष जोर
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी आंकड़े पूर्णतः गोपनीय रहेंगे। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी को साझा करना दंडनीय अपराध है। यहां तक कि जनगणना डेटा को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में भी उपयोग नहीं किया जा सकता।सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी व्यक्तिगत जनगणना जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, जिससे नागरिकों की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
ऐतिहासिक महत्व और उपयोगिता
भारत की जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में से एक है। इसकी शुरुआत 1872 में हुई थी, जबकि 1881 में पहली बार पूरे देश में एक साथ जनगणना कराई गई थी।जनगणना 2027, 1872 के बाद 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी। इसके आंकड़े सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए आधार बनते हैं।
आज के प्रशिक्षण में एसडीएम गंगाधर वाहिले,तहसीलदार सुरेंद्र उर्वशा, मास्टर ट्रेनर्स टिकेश्वर सिंह ठाकुर,निरंकार श्रीवास्तव, नुमेश सोनी, खेमलाल कटेंद्र, अशोक ठाकुर, विकास कोमरे, हितेश यादव, नीलेश गावडे, द्रोण टांडिया के साथ साथ भानुप्रतापपुर के सभी सात सर्किल के सुपरवायजर एवं प्रगणक उपस्थित थे।