नई दिल्ली। इन दिनों शहरों के आधुनिक फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में सजावट का तरीका तेजी से बदल रहा है। लोग केवल महंगे सामान से घर सजाने के बजाय अपनी पुरानी संस्कृति को भी जीवित रख रहे हैं। अब घरों के लिविंग रूम और कमरों में पारंपरिक लोक कलाएं नए रूप में दिखाई दे रही हैं। सदियों पुरानी चित्रकारी को अब आधुनिक कैनवास, कपड़ों और लकड़ी के फ्रेम पर उकेरा जा रहा है।
सजावट के लिए 5 प्रसिद्ध कलाएं पहली पसंद
घरों को नया रूप देने के लिए 5 मुख्य पारंपरिक कलाओं का प्रयोग सबसे ज्यादा हो रहा है। इसमें बिहार की मधुबनी चित्रकारी शामिल है। इसे हल्दी, चंदन, नील और चावल के आटे जैसे प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की गोंड जनजाति की कला भी काफी लोकप्रिय हो रही है। इसमें बारीक रेखाओं और बिंदुओं की मदद से पेड़-पौधों और जानवरों के चित्र बनाए जाते हैं।
कलमकारी और पट्टचित्र से मिला अनोखा लुक
आंध्र प्रदेश की कलमकारी कला को पहले बांस की कलम से बनाया जाता था। आज इसका इस्तेमाल कुशन कवर और डाइनिंग टेबल की सजावट में हो रहा है। वहीं ओडिशा और बंगाल का पट्टचित्र कपड़ों पर पौराणिक कहानियों को दर्शाता है। इसमें भगवान जगन्नाथ और रामायण से जुड़े सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र की वर्ली कला में लाल और सफेद रंग के जरिए पुराने समय के जीवन को दिखाया जाता है।
स्थानीय कलाकारों को मिला नया मंच
इंटीरियर डिजाइन में आए इस नए बदलाव से घरों को सुंदर और शांत माहौल तो मिल ही रहा है, साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। कंक्रीट के सादे कमरों में यह चित्रकारी एक नया आकर्षण जोड़ती है। आने वाले समय में आधुनिक घरों में इन पुरानी कलाओं का उपयोग और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।