नई दिल्ली। आज के दौर में वीकेंड पर शॉपिंग मॉल जाना और दोस्तों के साथ घूमना हमारी जीवन शैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोगों के एक साथ जुटने और खरीदारी करने के इस नए ठिकाने की शुरुआत कैसे हुई। आज हम जिस आधुनिक परिसर को देखते हैं, उसके पीछे एक ऐसे इंसान का हाथ है जिसने अपनी जान बचाकर एक अनजान देश में कदम रखा था।
वियना की गलियों से हुई शुरुआत
शॉपिंग मॉल का इतिहास ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना से जुड़ा है। वहां 18 जुलाई 1903 को जन्मे विक्टर ग्रुएन को बचपन से ही कला और इमारतों के नक्शे बनाने में काफी दिलचस्पी थी। अपनी इसी पसंद के कारण उन्होंने वियना की प्रसिद्ध अकादमी से पढ़ाई पूरी की और नए तरह के डिजाइन तैयार करने लगे।
नाजियों का डर और नया सफर
साल 1938 में जब नाजी सेना ने ऑस्ट्रिया पर कब्जा कर लिया, तो यहूदी होने की वजह से विक्टर ग्रुएन की जान पर खतरा मंडराने लगा। अपनी जान बचाने के लिए वे अपना घर, काम और पुरानी पहचान पीछे छोड़कर अमेरिका चले गए। बिना किसी पहचान के एक नए देश में पहुंचकर उन्होंने अपने जीवन की नई शुरुआत की और वहीं पर उन्होंने सबसे पहले बंद परिसर वाले बाजार की योजना बनाई।
आज की जीवनशैली पर असर
विक्टर ग्रुएन के इस अनोखे विचार ने आगे चलकर पूरी दुनिया में खरीदारी और मनोरंजन के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया। आज जिस तरह हम एक ही छत के नीचे खरीदारी, घूमना और खानपान का आनंद लेते हैं, उसकी नींव उसी दौर में रखी गई थी। आज यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है।