रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि सरकार का लक्ष्य आगामी शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक को विधानसभा से पारित कराने का है। इस कानून के मसौदे को तैयार करने के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की पहली औपचारिक बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश डॉ. रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी यह समिति केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि जन-भागीदारी के साथ काम करेगी। छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न विशेषज्ञों से सुझाव व फीडबैक प्राप्त करने के लिए जल्द ही एक विशेष वेब पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जिसके जरिए लोग सीधे अपने विचार समिति तक पहुँचा सकेंगे।
समिति का गठन और रूपरेखा
राज्य कैबिनेट ने 15 अप्रैल को यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति बनाने का निर्णय लिया था, जिसका आधिकारिक आदेश 25 जून को जारी किया गया। समिति में अध्यक्ष डॉ. रंजना प्रकाश देसाई के अलावा शत्रुघ्न सिंह, मोहन पवार, एमके राउत और ज्योति रानी सिंह को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। मुख्य सचिव कक्ष में आयोजित पहली बैठक में ड्राफ्ट तैयार करने की समय-सीमा और कार्ययोजना पर विस्तृत मंथन हुआ।
यूसीसी के लागू होने से क्या बदलेंगे नियम?
समान विवाह व तलाक नियम: सभी धर्मों में शादी की न्यूनतम उम्र और नियम एक समान होंगे। बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी।
संपत्ति में बराबरी का हक: पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटी दोनों को समान उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: विवाह के साथ-साथ ‘लिव-इन’ संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा।
गोद लेने की सरल व्यवस्था: बच्चों को गोद लेने (एडॉप्शन) की प्रक्रिया को धर्म-निरपेक्ष, पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा।
संविधान का अनुच्छेद 44 और समानता की पहल
वर्तमान में विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के अपने ‘पर्सनल लॉ’ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) के तहत सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि इस कानून से कानूनी जटिलताएँ खत्म होंगी और महिलाओं को लैंगिक समानता तथा न्याय सुनिश्चित होगा। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी हाल ही में यूसीसी विधेयक पारित किया जा चुका है।