नई दिल्ली: केंद्र सरकार आयकर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सरल और करदाता-अनुकूल बनाने की दिशा में नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि नियमों का पालन करने वाले ईमानदार करदाताओं को किसी भी तरह के अनावश्यक नोटिस या जांच प्रक्रिया से परेशान न किया जाए।
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि कर प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि टैक्स अनुपालन (Compliance) की प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को करदाताओं के साथ भरोसेमंद माहौल बनाने और लंबित मामलों के जल्द निपटारे की हिदायत दी।
कार्रवाई के प्रमुख बिंदु:
ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत: वित्त मंत्री ने साफ किया कि समय पर और सही रिटर्न दाखिल करने वाले नागरिकों के मन से आयकर विभाग का डर खत्म होना चाहिए। उन्हें बेवजह जांच के दायरे में न लाया जाए।
टैक्स चोरी पर तकनीक से लगाम: जहां एक ओर ईमानदार करदाताओं को राहत देने की बात कही गई, वहीं टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के जरिए सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
लंबित मामलों का त्वरित निपटारा: अदालतों और ट्रिब्यूनल में फंसे पुराने टैक्स विवादों को समयबद्ध तरीके से सुलझाने पर जोर दिया गया है, ताकि सरकार को राजस्व मिले और करदाताओं को कानूनी उलझनों से मुक्ति मिले।
डिजिटल व्यवस्था से मिली रफ्तार
सरकार द्वारा लागू किए गए नए आयकर कानूनों, त्वरित रिफंड प्रणाली और पूरी तरह से डिजिटल (फेसलेस) प्रक्रियाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 3.34 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 2 करोड़ से ज्यादा रिटर्न का सफलतापूर्वक निपटारा भी किया जा चुका है।
वित्त मंत्री के इन निर्देशों से साफ है कि सरकार ‘टैक्सपेयर फ्रेंडली’ माहौल तैयार करने और स्वैच्छिक कर भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।