आयोग ने बच्चों के जोखिम भरे कृत्य को नियंत्रित करने के लिए अनुशंसा की, डाॅ. वर्णिका शर्मा ने कहा -बच्चों के अनमोल जीवन को बचाना जरूरी


छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संचालक लोक शिक्षण, सर्व कलेक्टर तथा जिला शिक्षा अधिकारियों को एक लिखित अनुशंसा भेजकर निर्देश जारी करने को कहा है कि बच्चों के अनमोल जीवन को जोखिम भरे करतबों से बचाया जाये । डाॅ. वर्णिका शर्मा ने अनुशंसा में लिखा है कि विगत दिनों में समाचार पत्रों के माध्यम से शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों में बच्चों द्वारा विदाई समारोह या अन्य अवसरों पर जोखिम भरे कृत्य करने के दृश्य संज्ञान में आये हैं जैसे बच्चों द्वारा चलते वाहनों पर खिड़कियों से बाहर निकलना, दुपहिया वाहनों के स्टंट, वाहनों की तेज रफ्तार से ड्रायविंग आदि, जिससे बच्चों के अनमोल जीवन को खतरा हो सकता है। उन्होंने यह लिखा है कि इसमें संदेह नहीं है कि किशोरावस्था में बच्चों में रोमांचक और साहसी कार्यों के प्रति रूझान होता है, परंतु इनसे बच्चों के अनमोल जीवन को खतरा नहीं पहुँचना चाहिए ।

यदि ऐसे कार्यों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में आने वाले वर्षों में ये जोखिम भरे करतब एक परंपरा का रूप भी ले सकते हैं । इसलिए आयोग ने बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर यह अनुशंसा की है कि शालाओं में विदाई समारोह या अन्य समारोह को यदि बच्चों द्वारा आयोजित किया जा रहा है तो इसकी सूचना शाला प्रबंधन को होना चाहिए एवं इसका एक प्रोटोकाॅल होना चाहिए ।

ऐसे समारोह गरिमामय तरीके से शिक्षकों की देखरेख में आयोजित किया जावे व शाला प्रबंधन सुनिश्चित करें कि इसमें कोई जोखिम भरे करतब न हों । अन्य अवसरों पर भी ऐसे कृत्यों को आयोजित ना होने देना शाला प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। यदि ऐसी घटनाएँ प्रकाश में आएँ तो तत्काल संबंधित शाला प्रमुख को नोटिस जारी कर कारण भी पूछा जावे व सचेत भी किया जावे । ऐसी घटनाएं प्रकाश में आने पर उचित पुलिस पदाधिकारियों द्वारा बच्चों को शालाओं में जाकर गंभीरता तथा स्नेह के साथ समझाईश दी जाये । उन्होंने अनुशंसा पर शिक्षा विभाग व कलेक्टर्स से कार्यवाही करते हुए आयोग को दिनांक 20 फरवरी 2026 तक लिखित में अवगत कराने का भी लेख किया है।

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