छत्तीसगढ़ कनेक्शन के साथ फिर खुला हनी ट्रैप का राज

Front page top

कृष्ण कुमार सिकंदर, रायपुर

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर हनी ट्रैप का पुराना नेटवर्क चर्चा में है। वर्ष 2019 में रायपुर के एक कारोबारी को सोशल मीडिया के जरिए प्रेमजाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की उगाही करने वाली मध्य प्रदेश की युवती श्वेता जैन का नाम अब इंदौर में सामने आए नए हनी ट्रैप मामले में फिर उभर आया है। पुलिस जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि पुराने नेटवर्क से जुड़े लोग दोबारा सक्रिय होकर कारोबारियों, नेताओं और अफसरों को निशाना बना रहे थे।


पांच साल पहले श्वेता जैन ने फेसबुक के माध्यम से रायपुर के एक व्यवसायी से संपर्क बढ़ाया था। दोस्ती, मुलाकात और निजी संबंधों के बाद कारोबारी के अश्लील वीडियो और फोटो तैयार किए गए और फिर उसे ब्लैकमेल कर करीब 1 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की रकम वसूली गई थी। उस समय भी जांच एजेंसियों के हाथ ऐसी डायरी और डिजिटल दस्तावेज लगे थे, जिनमें छत्तीसगढ़ के कई रसूखदार लोगों, पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के नाम सामने आए थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि गिरोह के साइबर एक्सपर्ट कुछ अफसरों को वर्षों तक ब्लैकमेल करते रहे।
अब इंदौर में सामने आए कथित “हनी ट्रैप पार्ट-2” ने फिर उसी नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। भोपाल स्तर से पूरे मामले की मॉनिटरिंग की जा रही है और इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह खुद जांच पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस के अनुसार श्वेता जैन, रेशू और अलका दीक्षित की तिकड़ी इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा थी। फिलहाल पुलिस वीडियो, कंटेंट और कथित पीड़ितों के नामों को लेकर बेहद सतर्क रवैया अपनाए हुए है और आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा रही।


इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ चल रही है। पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें रेशू और हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा की रिमांड 25 मई तक है, जबकि श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित की रिमांड 26 मई को समाप्त होगी। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सीमित समय में अधिक से अधिक डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य जुटाने की चुनौती है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन शहरों तक फैला था और क्या इसमें कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी रही है।

डीसीपी क्राइम राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है और यह जांचा जा रहा है कि साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि बरामद कंटेंट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गवाहों की मौजूदगी में जांच की जाएगी। पुलिस रेशू के उस दावे की भी पड़ताल कर रही है, जिसमें उसने खुद को यूपीएससी पास बताया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि श्वेता और रेशू दोनों मध्य प्रदेश के सागर क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और एक-दूसरे को पहले से जानती थीं। वहीं अलका दीक्षित से श्वेता की मुलाकात जेल में हुई थी। पुलिस के अनुसार जेल में पहचान होने के बाद पेशियों और अन्य माध्यमों से इनके बीच संपर्क लगातार बना रहा।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि श्वेता जैन पहले भी हनी ट्रैप मामलों में आरोपी रह चुकी है और उसे यह अच्छी तरह पता था कि लोगों को किस तरह फंसाकर ब्लैकमेल किया जाता है। इसी अनुभव का इस्तेमाल कर इंदौर के बिल्डर हितेंद्र चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर को कथित रूप से धमकाया गया और उससे उगाही की कोशिश की गई। हालांकि वीडियो और कथित नेताओं के नामों को लेकर पुलिस ने अभी किसी भी दावे की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *