पुलिस–पत्रकारों को बदनाम करने की साजिश पर संघ का हमला, कई गंभीर सवाल उठाए

भानुप्रतापपुर। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान प्रेसवार्ता कर हालहि में कांग्रेसी कार्यकर्ताओ के द्वारा एसडीओपी शेर बहादुर सिह का पुतला दहन एवं पत्रकारों पर अभद्र टिप्पणी किये जाने पर नाराजगी जताते हुए कार्यवाही की मांग की है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संघ ने एसडीओपी शेर बहादुर सिंह का पुतला दहन किए जाने की घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोपसिंह आँचला और उनके साथियों ने आखिर किसके कहने पर यह कदम उठाया। एक वर्दीधारी पुलिस अधिकारी का पुतला जलाने और सड़क पर जबरन वाहन रोकने का अधिकार किसने दिया, इस पर भी जवाब मांगा गया है।
पार्षद तुषार ठाकुर द्वारा पत्रकारों पर लगाए गए आरोपों को भी गंभीर बताया गया है। संघ ने कहा कि पत्रकारों को “दलाल” और “चोर-चोर मौसेरे भाई” कहना निंदनीय है। यदि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संघ ने अवैध रेत उत्खनन के मुद्दे पर भी कई प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जिस गांव में अवैध उत्खनन की बात कही जा रही है, वहां के ग्रामीण धरना प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए और उनकी ओर से कोई शिकायत आवेदन क्यों नहीं दिया गया। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि घटना स्थल से लगभग 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर में यह धरना प्रदर्शन किसके संरक्षण में आयोजित किया गया।
विज्ञप्ति में विधायक सावित्री मण्डावी और सुनील (बबला) पाढ़ी से भी सवाल करते हुए ग्राम सटेली में संचालित कथित अवैध रेत घाट को लेकर जवाब मांगा गया है। संघ ने यह भी पूछा कि चारामा क्षेत्र में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के मुद्दे पर विधानसभा में आवाज क्यों नहीं उठाई जाती।
इसके अलावा पार्षद तुषार ठाकुर के सरकारी आवास में रहने और सरकारी जमीन की कथित बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ ने कन्हार गांव की चारागाह भूमि पर फर्जी पट्टा बनाकर अवैध निर्माण के आरोपों की जांच की मांग करते हुए कहा कि इसकी शिकायत कलेक्टर और एसडीएम से की जाएगी। यदि प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में तथ्यात्मक जवाब नहीं दिए गए और आरोपों का खंडन नहीं हुआ, तो वे कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

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