अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में आज रामनवमी का पर्व एक अलौकिक और ऐतिहासिक अनुभव बनने जा रहा है। प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला के जन्मोत्सव पर आज विज्ञान और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। दोपहर ठीक 12 बजे आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति की मदद से सूर्य देव साक्षात रामलला के ललाट पर तिलक लगाएंगे। यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक रहेगा, जिसमें सूर्य की किरणें सीधे भगवान के मस्तक को सुशोभित करेंगी।
इस विशेष अवसर के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने व्यापक तैयारियां की हैं। रामलला को आज स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र और हीरे-माणिक से जड़ा मुकुट पहनाया जाएगा। इन वस्त्रों को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा है। जन्मोत्सव के समय गर्भगृह में 14 विशेष पुजारी मौजूद रहेंगे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक तय किया गया है। सूर्य तिलक के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए वीआईपी एंट्री पर पूरी तरह रोक रहेगी।
बेंगलुरु के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए विशेष उपकरणों के माध्यम से सूर्य की किरणों को परावर्तित कर तिलक का स्वरूप दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का सफल परीक्षण पहले ही किया जा चुका है। जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा, जिसके लिए परिसर में 6 उच्च क्षमता वाले कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही पूरी अयोध्या नगरी में जगह-जगह एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन सकें।
सुरक्षा के लिहाज से राम जन्मभूमि परिसर में पहली बार एआई तकनीक और 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। सादी वर्दी में तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें सरयू घाटों पर मुस्तैद हैं। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भारी वाहनों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की ओर डायवर्ट किया गया है।
जन्मोत्सव के उपरांत रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। इसमें पंचामृत, खुरचन पेड़ा, खीर और हलवे के साथ करीब 10 क्विंटल फलाहार प्रसाद तैयार किया गया है। भगवान को अर्पित करने के बाद यह प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा। आज सुबह भगवान का दूध, दही, घी और शहद के साथ विशेष अभिषेक किया गया, जिसके बाद उन्हें स्वर्ण आभूषणों और सोने के धनुष-बाण से सजाया गया है।