चारमा/
रिपोर्ट: अनूप वर्मा
छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश के साथ-साथ चारामा क्षेत्र में भी पिछले 4 महीनों से रेबीज रोधी टीके (Anti-Rabies Vaccine) की सप्लाई पूरी तरह बंद है। सरकारी पशु चिकित्सालयों में दवा उपलब्ध न होने से अब लोगों की जान और माल दोनों जोखिम में हैं।
चारमा में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
रेबीज के शिकार पशुपालक जब सरकारी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
बाहरी खर्च की मार: चारामा में वैक्सीन की सरकारी सप्लाई न होने के कारण नागरिकों को मजबूरन निजी दुकानों और खुले बाजार से महंगे दामों पर टीका खरीदकर लाना पड़ रहा है।
पशुपालकों की चिंता: मवेशियों को रेबीज का टीका लगवाने के लिए पशुपालकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है, क्योंकि सरकारी पशु चिकित्सालयों में स्टॉक पूरी तरह खत्म है।
अधिकारियों ने दी पत्र के जरिए जानकारी
इस गंभीर समस्या को लेकर जब स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वैक्सीन की मांग को लेकर विभाग को पहले ही लिखित पत्र के माध्यम से सूचित किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, ऊपर से ही सप्लाई न होने के कारण स्थानीय स्तर पर वितरण संभव नहीं हो पा रहा है।
प्रमुख बिंदु:
सप्लाई का अभाव: चारामा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में पिछले 120 दिनों से एक भी डोज उपलब्ध नहीं हुई है।
बाजार की मनमानी: सरकारी टीका मुफ्त होने के बावजूद, लोगों को अब बाहर से 400 से 600 रुपये प्रति डोज खर्च करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती: उच्च स्तर पर पत्राचार के बावजूद अब तक समाधान की कोई किरण नजर नहीं आ रही है।
सावधान: रेबीज एक घातक बीमारी है। प्रशासन की इस सुस्ती के कारण यदि समय पर उपचार नहीं मिला, तो किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
रिपोर्ट: अनूप वर्मा