भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने भोपाल और इंदौर सहित राज्य के आठ शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने राज्य सरकार से आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया गया है तथा एक संयुक्त समिति का गठन भी किया गया है।
एनजीटी के अनुसार राजधानी भोपाल सहित कई शहरों में वायु गुणवत्ता निर्धारित मानकों से नीचे पहुंच चुकी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है, जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास शामिल हैं। इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन सभी आठ शहरों को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में ऐसे शहरों की संख्या छह थी, जो अब बढ़कर आठ हो गई है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।