चारामा/कांकेर: कांकेर-नारायणपुर सीमा पर छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में शनिवार को नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट की चपेट में आने से शहीद हुए बस्तर फाइटर्स के जवान संजय गढ़पाले का रविवार को उनके पैतृक ग्राम हराडुला (चारामा) में पूरे राजकीय और सामाजिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
कोरर चौक और हराडुला में उमड़ा जनसैलाब
इससे पहले, नारायणपुर में राजकीय सम्मान के बाद जब शहीद का शव रवाना हुआ, तो चारामा नगर के कोरर चौक पर नगरवासियों और युवाओं ने फूलों की चादर बिछाकर उन्हें नमन किया। ग्राम बिरोध करिया और हराडुला चौक पर भी हजारों की संख्या में लोग अपने नायक के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। युवाओं का एक बड़ा जत्था बाइक रैली के साथ अंतिम यात्रा में शामिल होकर गांव तक पहुंचा।

घर पहुंचा पार्थिव शरीर, तो फट पड़ा कलेजा
जैसे ही शहीद संजय का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। ताबूत में अपने जवान बेटे को मृत अवस्था में देखकर माता-पिता का कलेजा फट गया। अपने लाडले को इस हालत में देख परिजनों और ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और हर तरफ बस सिसकियां ही सुनाई दे रही थीं। घर के आंगन में ही उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार से पूर्व की विधियां पूरी की गईं। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को कन्धा देते हुए देते हुए घर से हराडुला के बाजार चौक जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाना था वहां लाया गया।

सामाजिक और राजकीय सम्मान के साथ विदाई
संजय गढ़पाले (महार ) समाज से थे, अतः समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों का सम्मानपूर्वक पालन किया गया। समाज के द्वारा पंचशील का पाठ किया गया, पुलिस अधिकारियों ने शहीद के सम्मान में लपेटे गए तिरंगे को उनके पिता को सौंपा। अधिकारियों ने गर्व के साथ कहा कि देश इस बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
इसके बाद विधायक सहित उपस्थित सभी जनप्रतिनिधि गणों सहित ग्राम वासियो, पुलिस और बस्तर फाइटर के जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पिता ने दी मुखाग्नि, अमर हुए संजय
अंतिम यात्रा के दौरान “शहीद संजय गढ़पाले अमर रहे” के नारों से आसमान गूंज उठा। पिता, भाई और मित्रों ने भारी मन से उन्हें कंधा दिया और अंततः पिता ने नम आंखों से अपने वीर पुत्र को मुखाग्नि दी। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक, भाजपा-कांग्रेस के जनप्रतिनिधि और बस्तर फाइटर्स के साथी जवानों सहित पूरा इलाका अपने लाल को विदाई देने पहुंचा।

शहनाइयों की जगह गूंजे मातम के सुर
संजय की शहादत ने उन खुशियों को मातम में बदल दिया जिसकी तैयारी परिवार महीनों से कर रहा था। शहीद की सगाई बीते 15 अप्रैल को लंजोड़ा ग्राम में हुई थी और जनवरी 2027 में उनका विवाह होना तय हुआ था। जिस घर में मंगल गीतों की तैयारी थी, वहां अब वीर सपूत की शहादत के नारे गूंज रहे थे।