धान खरीदी संकट गहराया: सहकारी कर्मचारी और ऑपरेटर संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल से खरीदी कार्य ठप्प

लाखों किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, और धान खरीदी कार्य में भारी विलंब हो रहा है।

कर्मचारियों ने सरकार से क्या कहा?

हड़ताली कर्मचारियों और ऑपरेटरों ने शासन को पूर्व में भी ज्ञापन सौंपकर अपनी माँगें रखी थीं, लेकिन समाधान न होने पर यह सामूहिक कदम उठाया गया है। उनके ज्ञापन में उल्लेखित मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:

सहकारी कर्मचारी महासंघ समिति का संविलियन व शासकीय सेवक का दर्जा: धान खरीदी समिति को संचालक/प्रमुख संरक्षक के अधीन अविलंब संविलियत किया जाए और कर्मचारियों को शासकीय सेवक का दर्जा दिया जाए। इसके लिए ₹3000 करोड़ का वित्तीय प्रावधान करते हुए अंतिम सुखद सूची जारी की जाए।

धान खरीदी ऑपरेटर संघ ऑपरेटरों का नियमितीकरण: धान खरीदी वर्ष 2024-25 में कंप्यूटर ऑपरेटरों के पद को आउटसोर्सिंग से हटाकर नियमितीकरण किया जाए।

सहकारी कर्मचारी महासंघ वेतनमान एवं प्रबंधकीय अनुदान: प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों के कार्यरत कर्मचारियों के वेतनमान के लिए, मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज़ पर, प्रतिवर्ष प्रत्येक समिति को ₹3 से ₹5 लाख की प्रबंधकीय अनुदान राशि दी जाए।

    सहकारी कर्मचारी महासंघ विभागीय भर्ती में प्राथमिकता: श्री काफले की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट/दिव्यांगजन अधिनियम 2018 में संशोधन करते हुए, नई भर्ती में सहकारी समितियों के सहायक कर्मचारियों को 50 प्रतिशत विभागीय भर्ती करते हुए योग्यता के साथ वरीयता दी जाए।

      हड़ताल का सीधा असर: किसान और प्रबंधक परेशान

      हड़ताल के कारण धान खरीदी का कार्य पूरी तरह से ठप्प हो गया है। किसान अपना धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

      आर्थिक चक्र प्रभावित: धान खरीदी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कार्य ठप्प होने से किसानों का पैसा रुक गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चक्र प्रभावित हो रहा है।

      दोनों ही संघों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर शासन द्वारा कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

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