ओपनएआई की रिपोर्ट: एआई क्षमता में भारत दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल, उपयोग में बड़े शहरों का दबदबा

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। ओपनएआई द्वारा बुधवार को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जटिल तर्क, कोडिंग और डेटा विश्लेषण के मामले में भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि प्रति व्यक्ति सोचने की क्षमता और एआई के उपयोग के मामले में भारत विश्व स्तर पर शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

शहरी क्षेत्रों में एआई की स्वीकार्यता अधिक

ओपनएआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत में एआई का उपयोग फिलहाल कुछ प्रमुख शहरी केंद्रों तक ही सीमित है। देश के शीर्ष 10 शहर कुल एआई उपयोगकर्ताओं का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं, जबकि इन शहरों की आबादी कुल जनसंख्या के 10 प्रतिशत से भी कम है। अमेरिका, यूके और जर्मनी जैसे देशों की तुलना में भारत में एआई अपनाने की दर बड़े शहरों में तीन गुना अधिक केंद्रित है। बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहर इस सूची में सबसे आगे हैं।

कोडिंग और डेटा विश्लेषण में जबरदस्त उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में ओपनएआई के कोडिंग टूल ‘कोडेक्स ऐप’ की लॉन्चिंग के महज दो सप्ताह के भीतर भारतीय उपयोगकर्ताओं में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई। एडवांस्ड इस्तेमाल के मामलों में शहरों के बीच बड़ा अंतर देखा गया है। अग्रणी शहरों में पिछड़े शहरों की तुलना में डेटा विश्लेषण का उपयोग 30 गुना और एआई डेवलपर टूल्स का उपयोग 9 गुना अधिक है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षेत्रीय रुझान

एआई के सार्थक उपयोग के मामले में छोटे राज्यों और पूर्वी क्षेत्रों से सकारात्मक रुझान मिल रहे हैं। शिक्षा और सीखने के क्षेत्र में असम सबसे आगे है, जहां कुल संदेशों का 22 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा से संबंधित है, जो राष्ट्रीय औसत से 20 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह ओडिशा, मणिपुर और छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा के लिए एआई का उपयोग बढ़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में अधिक जुड़ाव देखा गया है। जम्मू-कश्मीर में हर 10 में से एक मैसेज स्वास्थ्य संबंधी होता है।

एआई के लोकतंत्रीकरण पर जोर

ओपनएआई के मैनेजिंग डायरेक्टर (इंटरनेशनल) ओलिवर जे ने कहा कि भारत की एआई यात्रा का अगला चरण तकनीक के लोकतंत्रीकरण पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनौती एआई के फायदों को अग्रणी शहरों से निकालकर व्यापक आबादी तक पहुंचाना है। इसके लिए भाषा, बुनियादी ढांचा और कौशल विकास पर काम करना अनिवार्य होगा। भारत की युवा और नई तकनीक को तेजी से अपनाने वाली आबादी इस अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *