बिजली उत्पादन में नंबर वन, फिर भी जनता पर क्यों पड़ा महंगी बिजली का बोझ?

छत्तीसगढ़ में बिजली की नई दरों में 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू होते ही प्रदेश में सियासत गरमा गई है। इस फैसले के खिलाफ पहले ही दिन आम आदमी पार्टी (आप) ने दुर्ग में सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि प्रचुर कोयला भंडार और भारी बिजली उत्पादन क्षमता होने के बावजूद छत्तीसगढ़ के लोगों को इतनी महंगी बिजली क्यों मिल रही है।

लगातार तीसरे साल बढ़े दाम, आम जनता की टूटी कमर

प्रदर्शन के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में लगातार तीसरे साल बिजली महंगी की गई है। पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो बिजली दरों में भारी इजाफा हुआ है:

वर्षबिजली दरों में बढ़ोतरी
20248.35%
20251.89%
20266.23%

नेताओं का कहना है कि लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।

महंगी बिजली पर खराब सर्विस, बार-बार कटौती से लोग परेशान

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि एक तरफ तो सरकार लगातार दाम बढ़ा रही है, लेकिन दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली सप्लाई नहीं मिल पा रही है। कई इलाकों में घोषित-अघोषित बिजली कटौती और तकनीकी खामियां जस की तस बनी हुई हैं। सरकार को कीमतें बढ़ाने के बजाय अपनी वितरण व्यवस्था और सर्विस की क्वालिटी सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

स्मार्ट मीटरों पर भी उठे सवाल, बिलिंग में गड़बड़ी का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने राज्य में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतें आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से लोगों के बिजली बिल अनाप-शनाप आ रहे हैं। बिलिंग की इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और मीटर रीडिंग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है।

विपक्ष की मांग: बिजली दरें तुरंत वापस ले सरकार

आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि बिजली दरों में की गई इस नई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए। इसके साथ ही स्मार्ट मीटरों को लेकर आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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