जनता को कोई कानून परेशान नही कर सकता: PM नरेंद्र मोदी

संसद का शीतकालीन सत्र अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आज दोनों सदनों में महत्वपूर्ण मुद्दों की भरमार और तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिलेगी। इसी बीच मंगलवार को राज्यसभा में वंदेमातरम पर विशेष चर्चा होनी है. लेकिन इससे पहले बीजेपी संसदीय समिति की बैठक हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक को संबोधित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं होना चाहिए।

इंडिगो संकट के बीच PM मोदी का बड़ा बयान: “कानून जनता को परेशान करने के लिए नहीं”

इंडिगो संकट से बढ़ती अफरा-तफरी के बीच वे मंगलवार को हुई भाजपा संसदीय दल की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बैठक के बाद बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुधार (Reforms) सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने वाले होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारतवासियों को सरकार से कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। कानून-नियम जनता की सुविधा के लिए हैं, उन्हें बोझ देने के लिए नहीं।”

रिजिजू के मुताबिक, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सिस्टम को सुधारना है, लेकिन ऐसे किसी नियम की जरूरत नहीं जो आम जनजीवन पर भार बन जाए।
इसके साथ ही उन्होंने सांसदों से तीसरे कार्यकाल में और तेज गति से काम करने का आह्वान किया।

लोकसभा में आज से चुनाव सुधारों पर महा-मुकाबला

लोकसभा में आज से उन चुनाव सुधारों पर विस्तृत चर्चा शुरू हो रही है, जो लंबे समय से टलते आ रहे थे। विपक्ष लगातार इस विषय पर बहस की मांग कर रहा था और अब अंततः इसे सदन के एजेंडे में शामिल किया गया है।
चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, और आज से इस बहस की औपचारिक शुरुआत होगी।

राहुल गांधी विपक्ष की ओर से करेंगे शुरुआत

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को विपक्ष की ओर से बहस की ओपनिंग करेंगे। पिछले कई महीनों से राहुल गांधी चुनाव आयोग और भाजपा पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाते रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वे आज सदन में इस मुद्दे को फिर जोरदार तरीके से उठाएंगे और संभव है कि कुछ नए तथ्य या कथित सबूत भी पेश करें।

SIR प्रक्रिया पर गरमाएगा माहौल

चर्चा के दौरान चुनाव आयोग की विशेष जांच रिपोर्ट (SIR) प्रक्रिया भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। विपक्ष SIR प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा सकता है।

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